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मैं उसूलों में कोई ढील नहीं कर सकता - आतिश इंदौरी

मैं उसूलों में कोई ढील नहीं कर सकता मैं उसूलों में कोई ढील नहीं कर सकता दोस्ती इश्क़ में तब्दील नहीं कर सकता दोस्ती एक छलावा ही रहेगी जानाँ इश्क़ का रूप मैं तब्दील नहीं कर सकता बे-वफ़ाओं से मेरा पाला पड़ा है ता-उम्र इश्क़ को तेरे कभी फ़ील नह…

पुरखों का हम मकान बेच आए - आतिश इंदौरी

पुरखों का हम मकान बेच आए पुरखों का हम मकान बेच आए धरती और आसमान बेच आए वो उड़ानों की बात करते हैं जो परिँदे उड़ान बेच आए यूँ ग़ुलामी ख़रीद लाये वो जो अपनी ज़बान बेच आए जात तलवार की बताई यूँ लोग मूँठ और मियान बेच आए क्यूँ शिकायत हो धूप स…

ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती - आतिश इंदौरी

ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती चलो पैदल वहाँ लॉरी नहीं जाती चली जाती है हँसने और हँसाने से दवा खाने से बीमारी नहीं जाती ज़ियादा सोचने से नींद जाती है मगर इस से परेशानी नहीं जाती मुआ'फ़ी माँ ने दे दी ख़्व…

मुश्किलों से भरे हालात की इक हद होगी - आतिश इंदौरी

मुश्किलों से भरे हालात की इक हद होगी मुश्किलों से भरे हालात की इक हद होगी क्यूँ परेशान हो ख़ुशियों की भी आमद होगी जब पड़ोसी सड़ी बदबू से परेशाँ होंगे तब कहीं जा के मेरी लाश बरामद होगी लिखते रहते हो जो भी उसको तो मानो अभ्यास जब वो चाहेगा तभी शे&…

करे छलनी वतन को जो उसे हमदर्द कहते हो - आतिश इंदौरी

करे छलनी वतन को जो उसे हमदर्द कहते हो करे छलनी वतन को जो उसे हमदर्द कहते हो है रक्षक हिंद का जो उस को दहशतगर्द कहते हो तुम्हारे शोर में पीड़ा हमारी कौन सुन पाता तुम्हे आदत है कि चिल्ला के झूटा दर्द कहते हो शिकायत चीख़ कर करने से हासिल कुछ नहीं …

भला कब मैं निशाने पर नहीं आया - आतिश इंदौरी

भला कब मैं निशाने पर नहीं आया भला कब मैं निशाने पर नहीं आया मेरे हाथों में पर पत्थर नहीं आया कहीं ठहरे नहीं फिर भी शिकायत हैं सफ़र में ख़ुशनुमा मंज़र नहीं आया मैं तौबा दोस्ती से कर तो लूँ लेकिन हमेशा पीठ पे ख़ंजर नहीं आया बुढ़ापे में हुआ ऐ…

दोस्तो पर्व है होली का चलो हो कुछ यूँ - आतिश इंदौरी

दोस्तो पर्व है होली का चलो हो कुछ यूँ दोस्तो पर्व है होली का चलो हो कुछ यूँ कोई दुश्मन ना रहे रंग लगाओ कुछ यूँ रूठ जाए कोई अपना तो मना लो कुछ यूँ कुछ नहीं तेरे बिना प्यार जता दो कुछ यूँ कुछ शजर भी हों परिंदे भी हों और इंसाँ भी मेरी चाहत हैं…

माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है - आतिश इंदौरी

माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है झोपडी हो या क़िला तब कही घर होता है तर बतर कोई दुआओं से अगर होता है हर किसी के लिए वो शख्स शज़र होता है तब्सिरा फूल नहीं करता कभी खुशबू का इश्क एलान नहीं करता अगर हो…

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