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माँ - प्रसून जोशी

माँ मैं कभी बतलाता नहीं पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ यूँ तो मैं दिखलाता नहीं तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ तुझे सब है पता, है न माँ तुझे सब है पता, मेरी माँ भीड़ में यूँ न छोड़ो मुझे घर लौट के भी आ न पाऊँ माँ भेज न इतना दूर मुझको तू याद भी…

माँ की याद - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

माँ की याद चीटियाँ अंडे उठा कर जा रही हैं और चिड़ियाँ नीड़ को चारा दबाए थान पर बछड़ा रंभाने लग गया है टकटकी सूने विजन पथ पर लगाए थाम आँचल थका बालक रो उठा है है खड़ी माँ शीश का गट्ठर गिराए बाँह दो चुमकारती-सी बढ़ रही हैं साँझ से कह दो बुझे द…

सुनाएँ हाल-ए-दिल कैसे किसी को हम ज़माने में - देवेश दीक्षित

सुनाएँ हाल-ए-दिल कैसे किसी को हम ज़माने में सुनाएँ हाल-ए-दिल कैसे किसी को हम ज़माने में बहुत तकलीफ़ होती है, ज़ुबाँ पर बात लाने में मुक़द्दर के मुताबिक ही कटी है ज़िंदगी सबकी किसी की राजशाही में, किसी की कारखाने में जुदा तुमसे हुए तो ज़िंदगी हर रोज़ …

हँसी आने पे चेहरे की उदासी छूट जाती है - राम प्रकाश बेखुद

हँसी आने पे चेहरे की उदासी छूट जाती है हँसी आने पे चेहरे की उदासी छूट जाती है कि जैसे जख्म भर जाने पे पपड़ी छूट जाती है वही इक रोज खो जाता है इस दुनिया के मेले में कि जिस बच्चे से उसकी माँ की उंगली छूट जाती है कभी सोचा है उस दिन उसके घर चूल्…

लेती नहीं दवाई अम्मा - प्रो.योगेश छिब्बर

लेती नहीं दवाई अम्मा लेती नहीं दवाई अम्मा, जोड़े पाई-पाई अम्मा दुःख थे पर्वत, राई अम्मा हारी नहीं लड़ाई अम्मा इस दुनिया में सब मैले हैं किस दुनिया से आई अम्मा दुनिया के सब रिश्ते ठंडे गरमागर्म रजाई अम्मा जब भी कोई रिश्ता उधड़े करती है…

ऐ मेरे शहर, यहां मुझे घाटा बहुत है - आला चौहान" मुसाफिर"

ऐ मेरे शहर, यहां मुझे घाटा बहुत है! ऐ मेरे शहर , यहां मुझे घाटा बहुत है! लाखों की भीड़ में सन्नाटा बहुत है !! माँ सुकून की रोटी यहां मिलती नहीं ! लोग कहते है महंगा आटा बहुत है !! मज़दूर का खून मालिक पीता है यहां ! चिखती मीले, बिरला टाटा …

ओ माई - ताहिर फ़राज़

ओ माई - ताहिर फ़राज़ अम्बर की ये ऊंचाई, धरती की ये गहराई तेरे मन मे है समाई ओ माई... तेरा मन अमृत का प्याला, यही काबा यही शिवाला तेरी ममता जीवनदायी ओ माई.. जी चाहे क्यूँ तेरे साथ रहू मै बनके तेरा हमजोली तेरे हाथ ना आउ यूँ चुप जाऊ यूँ खेलु आँख …

माँ पर बेहतरीन शायरी

माँ पर कुछ शेर / माँ पर बेहतरीन शायरी जीवन की शुरुवात में जो हमसे जुडी रहती है वो है माँ | माँ पर लिखने जाये तो कई किताबे भर जायेगी फिर भी लिखने को काफी कुछ बाकी रह जायेगा | आप सभी के लिए हम लाये है कुछ चुने हुए शेर अपनी महबूबा में अपनी माँ दे…

माँ पर लिखे मुनव्वर राना के कुछ शेर

माँ पर लिखे मुनव्वर राना के कुछ शेर मुनव्वर राना वो शायर है जिन्होंने हुस्न, इश्क़ को न चुनकर रिश्ते नातो और बहन, बेटी पर शायरी की है | मुनव्वर राना साहब के माँ पर लिखे गए कुछ चुनिंदा शेर पेश है : चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है मैंने जन्नत …

जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है - अंजुम रहबर

जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है उन का हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है चाँद तारे मिरे क़दमों में बिछे जाते हैं ये बुज़ुर्गों की दुआओं का असर लगता है माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं सर पे आँचल नहीं …

उठते ही घर ठीक करेगी - डॉ. जियाउर रहमान जाफ़री

उठते ही घर ठीक करेगी उठते ही घर ठीक करेगी माँ फिर बिस्तर ठीक करेगी चावल हमें खिला देने को कंकड़ पत्थर ठीक करेगी गिन के सिक्के चार दफ़ा में फिर ख़ुद छप्पर ठीक करेगी धुंआ धुंआ इस घर को कर के कितने मच्छर ठीक करेगी इस ज़िद पे हैं काहिल बेटे …

माँ के घर जब सभी बेटियाँ आ गईं - डॉ. जियाउर रहमान जाफरी

माँ के घर जब सभी बेटियाँ आ गईं फूल खुशबू चमक तितलियां आ गईं माँ के घर जब सभी बेटियाँ आ गईं जा के अंदाज़ ताकत का फिर लग गया जब बगावत में सब लड़कियां आ गईं मुझको उस पार जाना कठिन जब लगा फिर दुआ माँ ने की कश्तियाँ आ गईं ज़िंदगी का मज़ा फिर तो जा…

बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब - राज़िक़ अंसारी

बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब अन्दर से है टूटे बाहर ख़ुश हैं सब देख लो अपनी प्यास छुपाने का अंजाम बोल रहा है एक समन्दर ख़ुश हैं सब ज़ख़्मों से दुख दर्द से लेना देना क्या तोड़ के शीशा मार के पत्थर ख़ुश है…

कह दो मंदिर में चले आएँ पुजारी सारे - कृष्ण बिहारी नूर

कह दो मंदिर में चले आएँ पुजारी सारे कह दो मंदिर में चले आएँ पुजारी सारे आज देवी ने पुकारा है परस्तारों को धर्म वालों को,ख़ुदा वालों को,दीं वालों को गर्दन-ए-ज़ुल्म पे चलती हुई तलवारों को आज कुछ गोशों से मंदिर के धुआँ उठता है ज़ेहर फैला है फ़ज़ाओ…

माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है - आतिश इंदौरी

माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है झोपडी हो या क़िला तब कही घर होता है तर बतर कोई दुआओं से अगर होता है हर किसी के लिए वो शख्स शज़र होता है तब्सिरा फूल नहीं करता कभी खुशबू का इश्क एलान नहीं करता अगर हो…

माँ - महावीर उत्तरांचली

माँ - महावीर उत्तरांचली "सूरा-40 अल-मोमिन," पवित्र कुरआन को माथे से लगाते हुए उस्ताद अख़लाक़ ने कहा, "शुरू नामे-अल्लाह से। जो बड़ा ही मेहरबान और निहायत ही रहम करने वाला है। यह पवित्र कुरआन उतारी गई है, अल्लाह की तरफ से। जो ज़बरदस्त ह…

अम्मा - आलोक श्रीवास्तव

चिंतन, दर्शन, जीवन, सर्जन, रूह, नज़र पर छाई अम्मा चिंतन, दर्शन, जीवन, सर्जन, रूह, नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर-शराबा,सूनापन,तनहाई अम्मा सारे रिश्ते- जेठ-दुपहरी, गर्म-हवा, आतिश, अंगारे झरना, दरिया, झील, समंदर, भीनी-सी पुरवाई अम्मा उसने ख़…

जब से गई है माँ मेरी रोया नहीं - कवि कुलवंत सिंह

जब से गई है माँ मेरी, रोया नहीं जब से गई है माँ मेरी, रोया नहीं बोझिल हैं पलकें फिर भी मैं सोया नहीं ऐसा नहीं आँखे मेरी नम हुई न हों, आँचल नहीं था पास फिर रोया नहीं साया उठा है माँ का मेरे सर से जब, सपनों की दुनिया में कभी खोया नहीं यादें …

तहलील - अख्तर-उल-ईमान

तहलील - अख्तर-उल-ईमान मेरी माँ अब मिट्टी के ढेर के नीचे सोती है उसके जुमले, उसकी बातों, जब वह ज़िंदा थी, कितना बरहम करती थी मेरी रौशन-तबई, उसकी जिहालत हम दोनों के बीच एक दीवार थी जैसे रात को ख़ुशबू का झोंका आए, जि़क्र न करना पीरों की सवारी…

शायद किसी काबिल ये मिरा सर भी नहीं है - कैफ़ भोपाली

शायद किसी काबिल ये मिरा सर भी नहीं है शायद किसी काबिल ये मिरा सर भी नहीं है किस्मत में तिरे पाँव कि ठोकर भी नहीं है माँ कहती है मर जाऊं तो लाएगा कफ़न कौन या रब! मिरा बेटा अभी नौकर भी नहीं है तन्हाई में वो भी कभी रो लेते तो होंगे दिल उनका नही…

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