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ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई - आलोक श्रीवास्तव

ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई, पानियों पर लिख गया आवाज़ कोई बाँध कर मेरे परों से मुश्किलों को, हौसलों को दे गया परवाज़ कोई नाम से जिसके मेरी पहचान होगी, मुझमें उस जैसा भी हो अंदाज़ कोई जिनका तारा था वो आँखें…

धड़कते साँस लेते रुकते चलते मैंने देखा है - आलोक श्रीवास्तव

धड़कते साँस लेते रुकते चलते मैंने देखा है धड़कते साँस लेते रुकते चलते मैंने देखा है कोई तो है जिसे अपने में पलते मैंने देखा है तुम्हारे ख़ून से मेरी रगों में ख़्वाब रौशन है तुम्हारी आदतों में ख़ुद को ढलते मैंने देखा है न जाने कौन है जो ख़्वाब…

तू जब राह से भटकेगा, मै बोलूँगा - आलोक श्रीवास्तव

तू जब राह से भटकेगा, मै बोलूँगा तू जब राह से भटकेगा, मै बोलूँगा मुझको कुछ भी खटकेगा, मै बोलूँगा सच का लहजा थोडा टेढा होता है जहाँ जहाँ तू अटकेगा, मै बोलूँगा अवसरवादी साथी-सा व्यवहार न कर, हाथ अगर तू झटकेगा, मै बोलूँगा विश्वासों का शीशा ना…

मंजिले क्या है रास्ता क्या है - आलोक श्रीवास्तव

मंजिले क्या है रास्ता क्या है मंजिले क्या है रास्ता क्या है हौसला हो तो फासला क्या है वो सजा देके दूर जा बैठा किस्से पुछू मेरी खता क्या है जब भी चाहेगा छीन लेगा वो सब उसी का है आपका क्या है तुम हमारे करीब बैठे हो अब दवा कैसी अब दुआ क्या ह…

तेरा सब कुछ मेरे अंदर बम भोले - आलोक श्रीवास्तव

तेरा सब कुछ मेरे अंदर बम भोले तेरा सब कुछ मेरे अंदर बम भोले, मंदिर मस्जिद कंकर पत्थर बम भोले घर से दूर न भेज मुझे रोटी लाने, सात गगन हैं, सात समंदर बम भोले कल सपने में सूरज के घोड़े आये, राख हो गईं आँखें जल कर बम भोले ठोकर मारें, सर पीटें…

अम्मा - आलोक श्रीवास्तव

चिंतन, दर्शन, जीवन, सर्जन, रूह, नज़र पर छाई अम्मा चिंतन, दर्शन, जीवन, सर्जन, रूह, नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर-शराबा,सूनापन,तनहाई अम्मा सारे रिश्ते- जेठ-दुपहरी, गर्म-हवा, आतिश, अंगारे झरना, दरिया, झील, समंदर, भीनी-सी पुरवाई अम्मा उसने ख़…

घर की बुनियादें, दीवारें बामो-दर थे बाबूजी - आलोक श्रीवास्तव

घर की बुनियादें, दीवारें, बामो-दर थे बाबूजी घर की बुनियादें, दीवारें, बामो-दर थे बाबूजी सबको बांधे रखने वाला ख़ास हुनर थे बाबूजी तीन मुहल्लों में उन जैसी क़द-काठी का कोई न था अच्छे-ख़ासे, ऊँचे-पूरे क़द्दावर थे बाबूजी अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन …

मैं जिस आदेश श्रीवास्तव को जानता हूँ - आलोक श्रीवास्तव

मैं जिस आदेश श्रीवास्तव को जानता हूँ आलोक श्रीवास्तव जी आदेश श्रीवास्तव जी के पारिवारिक मित्र है और उनकी मृत्यु पर उन्होंने यह संस्मरण अपने फेसबुक वाल पर पोस्ट किया था जिसे हम यथावत आप हेतु प्रस्तुत कर रहे है मैं जिस आदेश श्रीवास्तव को जानता हूँ...…

हर बार हुआ है जो, वही तो नहीं होगा - आलोक श्रीवास्तव

हर बार हुआ है जो, वही तो नहीं होगा हर बार हुआ है जो, वही तो नहीं होगा डर जिसका सताता है, अभी तो नहीं होगा दुनिया को चलो परखे, नए दोस्त बनाये हर शख्स ज़माने में, वही तो नहीं होगा वो शख्स बड़ा है तो गलत हो नहीं सकता दुनिया को भरोसा ये, अभी तो न…

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