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हिन्दी गज़ल और कृष्ण बिहारी नूर - कृष्ण कुमार नाज़

हिन्दी गज़ल और कृष्ण बिहारी नूर हिन्दी ग़ज़ल के विकास में वही ग़ज़लकार सही अर्थों में सहयोग दे सकते हैं, जो ग़ज़ल के शिल्प और उसकी कोमलता से परिचित हैं। इस कार्य को बख़ूबी अंजाम दिया श्री कृष्णबिहारी 'नूर' ने। नूर साहब चूँकि मूलरूप से ग़ज़लकार …

आग है पानी है मिट्टी है हवा है मुझ में - कृष्ण बिहारी नूर

आग है पानी है मिट्टी है हवा है मुझ में आग है पानी है मिट्टी है हवा है मुझ में और फिर मानना पड़ता है ख़ुदा है मुझ में अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझ में मुझ को मुझ से जो जुदा कर के छुपा है मुझ में जितने मौसम हैं सभी जैसे कहीं मिल जाएँ इन…

बिछड़ के तुझ से न जीते हैं और न मरते हैं - कृष्ण बिहारी नूर

बिछड़ के तुझ से न जीते हैं और न मरते हैं बिछड़ के तुझ से न जीते हैं और न मरते हैं अजीब तरह के बस हादसे गुज़रते हैं ज़मीन छोड़ न पाऊँगा इंतिज़ार ये है वो आसमान से धरती पे कब उतरते हैं ये किस ने खींच दी साँसों की लक्ष्मण-रेखा कि जिस्म जलता है …

लम्हा तो एक सदी को जनम दे के मर गया - कृष्ण बिहारी नूर

लम्हा तो एक सदी को जनम दे के मर गया लम्हा तो एक सदी को जनम दे के मर गया लेकिन अज़ीम काम भी लम्हे में कर गया अगले जनम में मिलने का वादा जो कर गया ऐसा लगा कि मांग में सिंदूर भर गया शाहों-गदा को, प्यार को, नफरत को, मौत को ये वक्त रौंदता हुआ सबक…

गाँव में क्या है शहर से बढ़ कर - कृष्ण बिहारी नूर

गाँव में क्या है शहर से बढ़ कर, चलिए चलकर गाँव में देखें गाँव में क्या है शहर से बढ़ कर, चलिए चलकर गाँव में देखें पनघट और चौपाल का मंज़र, चलिए चलकर गाँव में देखें गोरी, घटाएँ, घूंघट, गागर, चलिए चलकर गाँव में देखें शर्त है लेकिन ख़ूब संभल कर, चलिए …

कह दो मंदिर में चले आएँ पुजारी सारे - कृष्ण बिहारी नूर

कह दो मंदिर में चले आएँ पुजारी सारे कह दो मंदिर में चले आएँ पुजारी सारे आज देवी ने पुकारा है परस्तारों को धर्म वालों को,ख़ुदा वालों को,दीं वालों को गर्दन-ए-ज़ुल्म पे चलती हुई तलवारों को आज कुछ गोशों से मंदिर के धुआँ उठता है ज़ेहर फैला है फ़ज़ाओ…

आधुनिक शायरी में जनजीवन - डॉ. कृष्ण कुमार नाज़

आधुनिक शायरी में जनजीवन - डॉ. कृष्ण कुमार नाज़ स्वर्गीय नूर साहब का यह मज़मून उनके प्रिय शिष्य डॉ. कृष्ण कुमार 'नाज़' ने हमें उपलब्ध कराया, जो उर्दू में नूर साहब की हस्तलिपि में था। नूर साहब ने ज़िंदगी-भर शायरी की और मुशायरे पढ़े, नस्र (गद्य) में…

जज्बात की आवाज - 2

जज्बात की आवाज - 2 आप पिछली पोस्ट यहाँ पढ़ सकते है जिंदगी में मुझे दूसरों के बाज-बाज अशआर ऐसे मिले, जिन्हें मुझे अपना कहने का बहुत दिल चाहा, बस यु ही जैसे किसी प्यारे बच्चे को गोद में लेकर आप उसके वालिदें के सामने कह देते है कि यह बच्चा तो मेरा है …

जज्बात की आवाज - कृष्ण बिहारी नूर

जज्बात की आवाज जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो मै नहीं कहता किताबो में लिखा है यारो अमिताभ बच्चन की आवाज में यह शेर भारत के बच्चे-बच्चे की जुबान पर रटा हुआ है, आम आदमी की आवाज में शायरी करने वाला यह शायर कृष्ण बिहारी नूर न सिर्फ खूबसूरत जिस…

धुन ये है आम तेरी रहगुज़र होने तक - कृष्ण बिहारी नूर

धुन ये है आम तेरी रहगुज़र होने तक धुन ये है आम तेरी रहगुज़र होने तक हम गुज़र जाएँ ज़माने को ख़बर होने तक मुझको अपना जो बनाया है तो एक और करम बेख़बर कर दे ज़माने को ख़बर होने तक अब मोहब्बत की जगह दिल में ग़मे-दौरां है आइना टूट गया तेरी नज़र …

ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं - कृष्ण बिहारी नूर

ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं, मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं ज़िन्दगी! मौत तेरी मंज़िल है दूसरा कोई रास्ता ही नहीं सच घटे या बड़े तो सच न रहे, झ…

इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तक़ाज़ा है बहुत कृष्ण बिहारी नूर

इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तक़ाज़ा है बहुत इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तक़ाज़ा है बहुत इन दिनों ख़ुद से बिछड़ जाने का धड़का है बहुत रात हो दिन हो कि ग़फ़लत हो कि बेदारी हो उस को देखा तो नहीं है उसे सोचा है बहुत तिश्नगी के भी मक़ामात हैं क्य…

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