ये हम को कौन सी दुनिया की धुन आवारा रखती है - अब्बास ताबिश
ये हम को कौन सी दुनिया की धुन आवारा रखती है ये हम को कौन सी दुनिया की धुन आवारा रखती है कि ख़ुद साबित-क़दम रह कर हमें सय्यारा रखती है अगर बुझने लगें हम तो हवा-ए-शाम-ए-तन्हाई किसी मेहराब में जा कर हमें दोबारा रखती है चलो हम धूप जैसे लोग ही उ…