माँ पर बेहतरीन शायरी

माँ पर बेहतरीन शायरी | माँ पर शायरी

माँ पर कुछ शेर / माँ पर बेहतरीन शायरी

जीवन की शुरुवात में जो हमसे जुडी रहती है वो है माँ | माँ पर लिखने जाये तो कई किताबे भर जायेगी फिर भी लिखने को काफी कुछ बाकी रह जायेगा | आप सभी के लिए हम लाये है कुछ चुने हुए शेर

अपनी महबूबा में अपनी माँ देखें
बिन माँ के लड़कों की फ़ितरत होती है
- जावेद अख़्तर



अब इक रूमाल मेरे साथ का है
जो मेरी वालिदा के हाथ का है
- सय्यद ज़मीर जाफ़री



अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
- मुनव्वर राना



माँ पर शायरी | आज फिर माँ मुझे मारेगी बहुत रोने पर आज फिर गाँव में आया है खिलौने वाला
आज फिर माँ मुझे मारेगी बहुत रोने पर
आज फिर गाँव में आया है खिलौने वाला
- नवाज़ ज़फ़र



इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है
- मुनव्वर राना



इस लिए चल न सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर
मेरी शह-रग पे मिरी माँ की दुआ रक्खी थी
- नज़ीर बाक़री



उसने खुद़ को खोकर मुझमें, एक नया आकार लिया है,
धरती अंबर आग हवा जल, जैसी ही सच्चाई अम्मा
- आलोक श्रीवास्तव



माँ पर शायरी | एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई ताबिश मैं ने इक बार कहा था मुझे डर लगता है
एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई ताबिश
मैं ने इक बार कहा था मुझे डर लगता है
- अब्बास ताबिश



एक लड़का शहर की रौनक़ में सब कुछ भूल जाए
एक बुढ़िया रोज़ चौखट पर दिया रौशन करे
- इरफ़ान सिद्दीक़ी



माँ पर शायरी | ऐ अँधेरे देख ले, मुह तेरा काला हो गया माँ ने आखे खोल दी, घर में उजाला हो गया
ऐ अँधेरे देख ले, मुह तेरा काला हो गया
माँ ने आखे खोल दी, घर में उजाला हो गया
- मुनव्वर राना



ऐ रात मुझे माँ की तरह गोद में ले ले
दिन भर की मशक़्क़त से बदन टूट रहा है
- तनवीर सिप्रा



कल अपने-आप को देखा था माँ की आँखों में
ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है
- मुनव्वर राना



कसम उस मौत की, उठती जवानी में जो आती है
उरूसे-नौ को बेवा, माँ को दीवाना बनाती है
- जोश मलीहाबादी



कहो क्या मेहरबाँ ना-मेहरबाँ तक़दीर होती है
कहा माँ की दुआओं में बड़ी तासीर होती है
- अंजुम ख़लीक़



कितना आसान है, बेटी का यूं मरना देखा
कोख में कत्ल हुई, बेटी का तड़पना देखा
- शकुंतला सरूपरिया



किताबों से निकल कर तितलियाँ ग़ज़लें सुनाती हैं
टिफ़िन रखती है मेरी माँ तो बस्ता मुस्कुराता है
- सिराज फ़ैसल ख़ान



किस शफ़क़त में गुँधे हुए मौला माँ बाप दिए
कैसी प्यारी रूहों को मेरी औलाद किया
- अंजुम सलीमी



किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई
- मुनव्वर राना



खुद की लाचारी में एक मां का कलपना देखा
आंखों से अश्क नहीं खून का टपकना देखा
- शकुंतला सरूपरिया



गुज़श्त दिन के हवादिस का ज़िक्र करती है
उदास शाम बहुत मेरी फ़िक्र करती है
- मयंक अवस्थी



घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा
ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे
- साजिद जावेद साजिद



घर के दालान में था जो उस शज़र को काट डाला
बच्चो ने बटवारे में माता पिता को बात डाला
- आतिश इंदौरी



घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे,
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
- आलोक श्रीवास्तव



माँ पर शायरी | घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में
घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में
- क़ैसर-उल जाफ़री



घर से निकले हुए बेटों का मुक़द्दर मालूम
माँ के क़दमों में भी जन्नत नहीं मिलने वाली
- इफ़्तिख़ार आरिफ़



चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है
मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
- मुनव्वर राना



माँ पर शायरी | चहचहाते थे पंछी खिलते थे गुल ये करिश्मा था माँ की बोली में
चहचहाते थे पंछी खिलते थे गुल
ये करिश्मा था माँ की बोली में
- आतिश इंदौरी



चैन से सोया भूखे पेट अक्सर
बात ऐसी थी माँ की लोरी में
- आतिश इंदौरी



जब चली ठंडी हवा बच्चा ठिठुर कर रह गया
माँ ने अपने ला'ल की तख़्ती जला दी रात को
- सिब्त अली सबा



जब तक माथा चूम के रुख़्सत करने वाली ज़िंदा थी
दरवाज़े के बाहर तक भी मुँह में लुक़्मा होता था
- अज़हर फ़राग़



जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है
- मुनव्वर राना



जब से गई है माँ मेरी, रोया नहीं
बोझिल हैं पलकें फिर भी मैं सोया नहीं
- कवी कुलवंत सिंह



जो समय पर ये बच्चे ना आने लगे,
अपने माँ बाप का दिल दुखाने लगे |
- अर्पित शर्मा अर्पित



टूटी खटिया, बिस्तर, कपड़े कौन रखे
बांट के अपनी माँ के ज़ेवर ख़ुश हैं सब
- राज़िक़ अंसारी



ताक़ पर जुज़दान में लिपटी दुआएँ रह गईं
चल दिए बेटे सफ़र पर घर में माएँ रह गईं
- इफ़्तिख़ार नसीम



तिफ़्ल में बू आए क्या माँ बाप के अतवार की
दूध तो डिब्बे का है तालीम है सरकार की
- अकबर इलाहाबादी



तेरे दामन में सितारे हैं तो होंगे ऐ फ़लक
मुझ को अपनी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी
- मुनव्वर राना



दिन भर की मशक़्क़त से बदन चूर है लेकिन
माँ ने मुझे देखा तो थकन भूल गई है
- मुनव्वर राना



दुःख थे पर्वत, राई अम्मा
हारी नहीं लड़ाई अम्मा
- प्रो.योगेश छिब्बर



दुआ को हात उठाते हुए लरज़ता हूँ
कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए
- इफ़्तिख़ार आरिफ़



दूर रहती हैं सदा उन से बलाएँ साहिल
अपने माँ बाप की जो रोज़ दुआ लेते हैं
- मोहम्मद अली साहिल



न लफ्ज़ तुझसे बड़े है, न सोच तुझसे बड़ी
में तेरे वास्ते कुछ भी तो नहीं लिख सकता
- राहत इन्दौरी



पर क्या लगे के घोसलो से उड़ गए सभी
वो फिर अकेली रह गई बच्चो को पाल कर
- उमर कामरान



परेशानी में पापा याद आए,
अकेलेपन में माँ की याद आई!!
- नित्तेश कुशवाह



पोटली... जिसके लिए लड़ने लगी औलादे
माँ की उस पोटली में अधबुने फंदे निकले
- आतिश इंदौरी



फूल खुशबू चमक तितलियां आ गईं
माँ के घर जब सभी बेटियाँ आ गईं
- डॉ. जिया उर रहमान जाफरी



बच्चों के साथ आज उसे देखा तो दुख हुआ
उन में से कोई एक भी माँ पर नहीं गया
- हसन अब्बास रज़ा



बर्बाद कर दिया हमें परदेस ने मगर
माँ सब से कह रही है कि बेटा मज़े में है
- मुनव्वर राना



बहन की इल्तिजा माँ की मोहब्बत साथ चलती है
वफ़ा-ए-दोस्ताँ बहर-ए-मशक़्कत साथ चलती है
- सय्यद ज़मीर जाफ़री



बाट के अपना चेहरा, माथा, आँखे जाने कहा गई
फटे पुराने एक एलबम में चंचल लड़की जैसी माँ
- निदा फ़ाज़ली



बाप ज़ीना है जो ले जाता है ऊँचाई तक
माँ दुआ है जो सदा साया-फ़िगन रहती है
- सरफ़राज़ नवाज़



बाबू जी गुज़रे, आपस में-सब चीज़ें तक़सीम हुई तब
मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से आई अम्मा
- आलोक श्रीवास्तव



बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन थोड़ी थोड़ी सी सब में,
दिन भर एक रस्सी के ऊपर चलती नटनी जैसी माँ
- निदा फ़ाज़ली



बूढ़ी माँ का शायद लौट आया बचपन
गुड़ियों का अम्बार लगा कर बैठ गई
- इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’



बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ
याद आती है चोका बासन, चिमटा फुकनी जैसी माँ
- निदा फ़ाज़ली



बोसे बीवी के, हँसी बच्चों की, आँखें माँ की
क़ैद-ख़ाने में गिरफ़्तार समझिए हम को
- फ़ुज़ैल जाफ़री



भारी बोझ पहाड़ सा कुछ हल्का हो जाए
जब मेरी चिंता बढ़े माँ सपने में आए
- अख़्तर नज़्मी



भूके बच्चों की तसल्ली के लिए
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक
- नवाज़ देवबंदी



माँ की आग़ोश में कल मौत की आग़ोश में आज
हम को दुनिया में ये दो वक़्त सुहाने से मिले
- कैफ़ भोपाली



माँ की ख़्वाहिश पे चलोगे तो दुआ पाओगे
हर तरफ़ अपने मुआफ़िक़ ही हवा पाओगे
- कृष्ण बिहारी नूर



माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है
आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है
- अंजुम सलीमी



माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है
झोपडी हो या क़िला तब कही घर होता है
- आतिश इंदौरी



माँ ख़्वाब में आ कर ये बता जाती है हर रोज़
बोसीदा सी ओढ़ी हुई इस शाल में हम हैं
- मुनव्वर राना



माँ दवा दारू तेरी कैसे कराऊँ
पत्नी कहती हैं कि बेटे और भी तो हैं
- आतिश इंदौरी



माँ पर शायरी | माँ ने लिखा है ख़त में जहाँ जाओ ख़ुश रहो मुझ को भले न याद करो घर न भूलना
माँ ने लिखा है ख़त में जहाँ जाओ ख़ुश रहो
मुझ को भले न याद करो घर न भूलना
- अजमल अजमली



माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे ने'मत
- अल्ताफ़ हुसैन हाली



माँ बैठ के तकती थी जहाँ से मिरा रस्ता
मिट्टी के हटाते ही ख़ज़ाने निकल आए
- मुनव्वर राना



माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं
सर पे आँचल नहीं होता है तो डर होता है
- अंजुम रहबर



माएँ दरवाज़ों पर हैं
बारिश होने वाली है
- जमाल एहसानी



मुआफ़ी माँ ने दे दी ख़्वाब में आकर
मगर सर से पशेमानी नहीं जाती
- आतिश इंदौरी



मुख़्तसर होते हुए भी ज़िंदगी बढ़ जाएगी
माँ की आँखें चूम लीजे रौशनी बढ़ जाएगी
मुनव्वर राना
- मुनव्वर राना



मुझे मालूम है मां की दुआएं साथ चलती हैं,
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैंने देखा है
- आलोक श्रीवास्तव



मुद्दतों ब'अद मयस्सर हुआ माँ का आँचल
मुद्दतों ब'अद हमें नींद सुहानी आई
- इक़बाल अशहर



मुनव्वर माँ के आगे यूँ कभी खुल कर नहीं रोना
जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती
- मुनव्वर राना



मेरी पहचान इतनी सी है बस
माँ की आँखों का लाडला हूँ मै
- आतिश इंदौरी



मैं अपनी माँ के वसीले से ज़िंदा-तर ठहरूँ
कि वो लहू मिरे सब्र-ओ-रज़ा में रौशन है
- अबुल हसनात हक़्क़ी



मैं इस से क़ीमती शय कोई खो नहीं सकता
'अदील' माँ की जगह कोई हो नहीं सकता
- अदील ज़ैदी



मैं ने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दें
सिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा लफ़्ज़-ए-माँ रहने दिया
- मुनव्वर राना



मैं ने माँ का लिबास जब पहना
मुझ को तितली ने अपने रंग दिए
- फ़ातिमा हसन



मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार
दुख ने दुख से बातें की बिन चिट्ठी बिन तार
- निदा फ़ाज़ली



यूँ सजाऊँगा मैं माँ की धानी साड़ी
चाँद तारों को किनारी में रखूँगा
- आतिश इंदौरी



ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सज्दे में रहती है
- मुनव्वर राना



ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ
इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
- मुनव्वर राना



रौशनी भी नहीं हवा भी नहीं
माँ का नेमुल-बदल ख़ुदा भी नहीं
- अंजुम सलीमी



वो लम्हा जब मेरे बच्चे ने माँ पुकारा मुझे
मैं एक शाख़ से कितना घना दरख़्त हुई
- हुमैरा रहमान



शर्म आई है मुझे अपने क़द-ओ-क़ामत पर
माँ के जब होंठ न पहोंचे मिरी पेशानी तक
- ग़ुलाम हुसैन साजिद



शहर के रस्ते हों चाहे गाँव की पगडंडियाँ
माँ की उँगली थाम कर चलना बहुत अच्छा लगा
- मुनव्वर राना



माँ पर शायरी | शहर में आ कर पढ़ने वाले भूल गए किस की माँ ने कितना ज़ेवर बेचा था
शहर में आ कर पढ़ने वाले भूल गए
किस की माँ ने कितना ज़ेवर बेचा था
- असलम कोलसरी



शायद यूँही सिमट सकें घर की ज़रूरतें
तनवीर' माँ के हाथ में अपनी कमाई दे
- तनवीर सिप्रा



सब ने माना मरने वाला दहशत-गर्द और क़ातिल था
माँ ने फिर भी क़ब्र पे उस की राज-दुलारा लिक्खा था
- अहमद सलमान



सामने माँ के जो होता हूँ तो अल्लाह अल्लाह
मुझ को महसूस ये होता है कि बच्चा हूँ अभी
- महफूजुर्रहमान आदिल



सिर्फ सोने का है दिखावा बस
नींद आती थी माँ की गोदी में
- आतिश इंदौरी



सुरूर-ए-जाँ-फ़ज़ा देती है आग़ोश-ए-वतन सब को
कि जैसे भी हों बच्चे माँ को प्यारे एक जैसे हैं
- सरफ़राज़ शाहिद



हजारो लफ्ज़, हजारो किताब दे देंगे
में तुझको लिखू तो कागज जवाब दे देंगे
- राहत इन्दौरी



हो जितना दुःख फिर भी माँ तो
तुलसी खाकर ठीक करेगी
- डॉ. जिया उर रहमान जाफरी

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