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सामने कारनामे जो आने लगे,
आईना लोग मुझको दिखाने लगे |

जो समय पर ये बच्चे ना आने लगे,
अपने माँ बाप का दिल दुखाने लगे |

फ़ैसला लौट जाने का तुम छोड़ दो,
फूल आँगन के आँसू बहाने लगे |

फिर शबे हिज़्र आँसूं मेरी आँख के,
मुझको मेरी कहानी सुनाने लगे |

आईने से भी रहते है वो दूर अब,
जाने क्यू खुदको इतना छुपाने लगे |

कोई शिकवा नही बेरुखी तो नही,
हम अभी आये है आप जाने लगे |

तेरी चाहत लिए घर से अर्पित चला,
सारे मंज़र नज़र को सुहाने लगे - अर्पित शर्मा "अर्पित"

परिचय
अर्पित शर्मा जी अर्पित उपनाम से रचनाये लिखते है आपके पिता का नाम कृष्णकांत शर्मा है | आपका जन्म मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में 28 अप्रैल, 1992 को हुआ | फिलहाल आप शाजापुर में रहते है | आपसे इस मेल sharmaarpit28@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है |

Roman
samne karname jo aane lage
aaina log mujhko dukhane lage

jo samay par ye bachche naa aane lage
apne maa baap ka dil dukhane lage

faisla lout aane ka tum chhod do
phool aangan ke aansu bahane lage

phir shab-e-hijr aansu meri aankh ke
mujhko meri kahani sunane lage

aaine se bhi rahte hai wo door ab
jane kyu khud ko itna chhupane lage

koi shikwa nahi berukhi to nahi
ham abhi aaye hai aap jane lage

teri chahat liye ghar se arpit chala
sare manzar nazar ko suhane lage - Arpit Sharma "Arpit"
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