
जौन एलिया के 25 बेहतरीन शेर
जौन एलिया वो शायर है जिन्होंने जीवन को अपने बिलकुल अलहदा नजरिये से शायरी में पिरोया है | आपने इश्क और दर्द को लेकर शायरी की | आप आशिकाना मिजाज़ के दिल टूटने के दर्द के साथ आपके मुशायरो में शेर कहने के अंदाज ने आपको आम-ओ-ख़ास में मशहूर कर दिया | आपके लिए पेश है जौन एलिया के 25 बेहतरीन शेर |
अपने सब यार काम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
आप बस मुझ में ही तो हैं, सो आप
मेरा बेहद ख़याल कीजिएगा
मेरा बेहद ख़याल कीजिएगा
इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने
उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं
एक ही तो हवस रही है हमें
अपनी हालत तबाह की जाए
अपनी हालत तबाह की जाए
और तो हमने क्या किया अब तक
ये किया है कि दिन गुज़ारे हैं
ये किया है कि दिन गुज़ारे हैं
कभी-कभी तो बहुत याद आने लगते हो
कि रूठते हो कभी और मनाने लगते हो
कि रूठते हो कभी और मनाने लगते हो
कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
कौन इस घर की देख-भाल करे
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है
क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
आख़िरी बार मिल रही हो क्या
आख़िरी बार मिल रही हो क्या
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
जमा हम ने किया है ग़म दिल में
इस का अब सूद खाए जाएँगे
इस का अब सूद खाए जाएँगे
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
तू भी चुप है मैं भी चुप हूं ये कैसी तन्हाई है
तेरे साथ तेरी याद आयी क्या तू सचमुच आयी है
तेरे साथ तेरी याद आयी क्या तू सचमुच आयी है
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
नहीं दुनिया को जब परवाह हमारी
तो फिर दुनिया की परवाह क्यूँ करें हम
तो फिर दुनिया की परवाह क्यूँ करें हम
बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
बिन तुम्हारे कभी नहीं आयी
क्या मेरी नींद भी तुम्हारी है
क्या मेरी नींद भी तुम्हारी है
मेरी जां अब ये सूरत है कि मुझ से
तेरी आदत छुड़ाई जा रही है
तेरी आदत छुड़ाई जा रही है
मैं अब हर शख़्स से उकता चुका हूं
फ़क़त कुछ दोस्त हैं, और दोस्त भी क्या
फ़क़त कुछ दोस्त हैं, और दोस्त भी क्या
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या
एक ही शख़्स था जहान में क्या
हम आंधियों के बन में किसी कारवां के थे
जाने कहां से आए थे, जाने कहां के थे
जाने कहां से आए थे, जाने कहां के थे
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