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बसंत आया - केदारनाथ अग्रवाल

बसंत आया बसंत आया : पलास के बूढ़े वृक्षों ने टेसू की लाल मौर सिर पर धर ली! विकराल वनखंडी लजवंती दुलहिन बन गई, फूलों के आभूषण पहन आकर्षक बन गई। अनंग के धनु-गुण के भौरे गुनगुनाने लगे, समीर की तितिलियों के पंख गुदगुदाने लगे। आम के अंग बौरों …

तुम न आओ धुप में - केदारनाथ अग्रवाल

तुम न आओ धुप में तुम न आओ धूप में धरती गरम है फूल पाँवो के बहुत नाजुक नरम है आ सकोगी तुम यहाँ तक यह भरम है - केदारनाथ अग्रवाल tum na aao dhoop me tum na aao dhoop me dharti garam hai phool paanvo ke bahut najuk naram hai …

आग लगे इस राम-राज में - केदारनाथ अग्रवाल

आग लगे इस राम-राज में आग लगे इस राम-राज में ढोलक मढ़ती है अमीर की चमड़ी बजती है गरीब की खून बहा है राम-राज में आग लगे इस राम-राज में [२] आग लगे इस राम-राज में रोटी रूठी, कौर छिना है थाली सूनी, अन्न बिना है, पेट धँसा है राम-राज में आग लगे…

ईद मुबारक - केदारनाथ अग्रवाल

ईद मुबारक हमको, तुमको, एक-दूसरे की बाहों में बँध जाने की ईद मुबारक। बँधे-बँधे, रह एक वृंत पर, खोल-खोल कर प्रिय पंखुरियाँ कमल-कमल-सा, खिल जाने की, रूप-रंग से मुसकाने की हमको, तुमको ईद मुबारक। और जगत के इस जीवन के खारे पानी के सागर…

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