sajjad-zaheer

कभी कभी बेहद डर लगता है - सज्जाद ज़हीर

कभी कभी बेहद डर लगता है कभी कभी बेहद डर लगता है कि दोस्ती के सब रुपहले रिश्ते प्यार के सारे सुनहरे बंधन सूखी टहनियों की तरह चटख़ कर टूट न जाएँ आँखें खुलें, बंद हों देखें लेकिन बातें करना छोड़ दें हाथ काम करें उँगलियाँ दुनिया भर के क़ज़िए…

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