कविता की मौत - धर्मवीर भारती
कविता की मौत लाद कर ये आज किसका शव चले और उस छतनार बरगद के तले किस अभागिन का जनाज़ा है रुका बैठ इसके पाँयते गर्दन झुका कौन कहता है कि कविता मर गई? मर गई कविता नहीं तुमने सुना? हाँ वही कविता, कि जिसकी आग से सूरज बना धरती जमी बरसात लहराई…