रात भी, नींद भी, कहानी भी - फ़िराक़ गोरखपुरी
रात भी, नींद भी, कहानी भी रात भी, नींद भी, कहानी भी हाय, क्या चीज़ है जवानी भी दिल को शोलों से करती है सेराब ज़िन्दगी आग भी है, पानी भी ख़ल्क़ क्या क्या मुझे नहीं कहती कुछ सुनूं मैं तेरी ज़ुबानी भी पास रहना किसी का रात की रात मेहमानी भी, म…