firaq-gorakhpuri

रात भी, नींद भी, कहानी भी - फ़िराक़ गोरखपुरी

रात भी, नींद भी, कहानी भी रात भी, नींद भी, कहानी भी हाय, क्या चीज़ है जवानी भी दिल को शोलों से करती है सेराब ज़िन्दगी आग भी है, पानी भी ख़ल्क़ क्या क्या मुझे नहीं कहती कुछ सुनूं मैं तेरी ज़ुबानी भी पास रहना किसी का रात की रात मेहमानी भी, म…

वो आँख ज़बान हो गई है - फ़िराक़ गोरखपुरी

वो आँख ज़बान हो गई है वो आँख ज़बान हो गई है हर बज़्म की जान हो गई है। आँखें पड़ती है मयकदों की, वो आँख जवान हो गयी है। आईना दिखा दिया ये किसने, दुनिया हैरान हो गयी है। उस नरगिस-ए-नाज़ में थी जो बात, शायर की ज़बान हो गयी है। अब तो तेरी ह…

नया घाव है प्रेम का जो चमके दिन-रात - फ़िराक़ गोरखपुरी

नया घाव है प्रेम का जो चमके दिन-रात नया घाव है प्रेम का जो चमके दिन-रात होनहार बिरवान के चिकने-चिकने पात यही जगत की रीत है, यही जगत की नीत मन के हारे हार है, मन के जीते जीत जो न मिटे ऐसा नहीं कोई भी संजोग होता आया है सदा मिलन के बाद वियोग …

हिण्डोला - फ़िराक़ गोरखपुरी

हिण्डोला - फ़िराक़ गोरखपुरी दयार-ए-हिन्द था गहवारा याद है हमदम बहुत ज़माना हुआ किस के किस के बचपन का इसी ज़मीन पे खेला है 'राम' का बचपन इसी ज़मीन पे उन नन्हे नन्हे हाथों ने किसी समय में धनुष-बान को सँभाला था इसी दयार ने देखी है 'कृ…

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं - फ़िराक गोरखपुरी

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं मिरी नज़रें भी ऐसे क़ातिलों का जान ओ ईमाँ हैं निगाहें मिलते ही जो जान और ईमान लेते हैं जिसे कहती है दुनिया कामयाबी व…

नई हुई फिर रस्म पुरानी दीवाली के दीप जले - फ़िराक गोरखपुरी

नई हुई फिर रस्म पुरानी दीवाली के दीप जले नई हुई फिर रस्म पुरानी दिवाली के दीप जले शाम सुहानी रात सुहानी दिवाली के दीप जले धरती का रस डोल रहा है दूर-दूर तक खेतों के लहराये वो आंचल धानी दिवाली के दीप जले नर्म लबों ने ज़बानें खोलीं फिर दुनिया स…

जो बात है हद से बढ़ गयी है - फ़िराक गोरखपुरी

जो बात है हद से बढ़ गयी है जो बात है हद से बढ़ गयी है वाएज़ के भी कितनी चढ़ गई है हम तो ये कहेंगे तेरी शोख़ी दबने से कुछ और बढ़ गई है हर शय ब-नसीमे-लम्से-नाज़ुक बर्गे-गुले-तर से बढ़ गयी है जब-जब वो नज़र उठी मेरे सर लाखों इल्ज़ाम मढ़ गयी ह…

बहुत कुछ यूँ तो था दिल में मगर लब सी लिए मैंने - फ़िराक गोरखपुरी

बहुत कुछ यूँ तो था दिल में मगर लब सी लिए मैंने बहुत कुछ यूँ तो था दिल में मगर लब सी लिए मैंने, अगर सुन लो तो आज एक बात मेरे दिल में आई है मुहब्बत दुश्मनी में कारगर है रश्क का जज़्बा, अजब रूसवाइयाँ हैं यह, अजब यह जग-हँसाई है हमीं ने मौत को आँख…

सबकी हालत एक है नादा - फ़िराक गोरखपुरी

सबकी हालत एक है नादा सबकी हालत एक है नादा कौन है गमगी, कौन है शादाँ उसका पाना है वह करिश्मा सोच तो मुश्किल, देख तो आसा बादाकशो को फिक्र है जिसकी बादा न सागर, बर्क न बारां दुनिया को दुनिया करना है ये मनसूबे, साज न सामां ढूंढ़ ले मुझको …

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