मोहब्बतों में हवस के असीर हम भी नहीं - मोहसिन नक़वी
मोहब्बतों में हवस के असीर हम भी नहीं मोहब्बतों में हवस के असीर हम भी नहीं ग़लत न जान के इतने हक़ीर हम भी नहीं नहीं हो तुम भी क़यामत की तुन्द ओ तेज़ हवा किसी के नक़्श ए क़दम की लकीर हम भी नहीं हमारी डूबती नब्ज़ों से ज़िन्दगी तो न माँग सख़ी तो हैं मगर …