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मोहब्बतों में हवस के असीर हम भी नहीं - मोहसिन नक़वी

मोहब्बतों में हवस के असीर हम भी नहीं मोहब्बतों में हवस के असीर हम भी नहीं ग़लत न जान के इतने हक़ीर हम भी नहीं नहीं हो तुम भी क़यामत की तुन्द ओ तेज़ हवा किसी के नक़्श ए क़दम की लकीर हम भी नहीं हमारी डूबती नब्ज़ों से ज़िन्दगी तो न माँग सख़ी तो हैं मगर …

ये दिल, ये पागल दिल मेरा, क्यू बुझ गया, आवारगी - मोहसिन नकवी

ये दिल, ये पागल दिल मेरा, क्यू बुझ गया, आवारगी ये दिल, ये पागल दिल मेरा, क्यू बुझ गया, आवारगी इस दश्त में इक शहर था, वो क्या हुआ, आवारगी कल शब मुझे बेशक्ल आवाज़ ने चौका दिया मैंने कहा तू कौन है, उसने कहा, आवारगी इक तू कि सदियों से मेरे हमराह भ…

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