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न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है - ख़ुमार बाराबंकवी

न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है दिया जल रहा है हवा चल रही है सुकूँ ही सुकूँ है ख़ुशी ही ख़ुशी है तिरा ग़म सलामत मुझे क्या कमी है खटक गुदगुदी का मज़ा दे रही है जिसे इश्क़ कहते हैं शायद यही है वो मौजूद ह…

अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं - खुमार बाराबंकवी

अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं अकेले हैं वो और झुँझला रहे हैं मिरी याद से जंग फ़रमा रहे हैं ये कैसी हवा-ए-तरक़्क़ी चली है दिए तो दिए दिल बुझे जा रहे हैं इलाही मिरे दोस्त हों ख़ैरियत से ये क्यूँ घर में पत्थर नहीं आ रहे हैं बहिश्त-ए-तसव्वुर …

रातो को दिन बनाए जमाने गुजर गए - खुमार बारंबकवी

पी पी के जगमगाए ज़माने गुज़र गए पी पी के जगमगाए ज़माने गुज़र गए रातों को दिन बनाए ज़माने गुज़र गए जान-ए-बहार फूल नहीं आदमी हूँ मैं आ जा कि मुस्कुराए ज़माने गुज़र गए क्या लाइक़-ए-सितम भी नहीं अब मैं दोस्तो पत्थर भी घर में आए ज़माने गुज़र गए …

वही फिर मुझे याद आने लगे हैं - ख़ुमार बारमबंकवी

वही फिर मुझे याद आने लगे हैं वही फिर मुझे याद आने लगे हैं जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं वो हैं पास और याद आने लगे हैं मोहब्बत के होश अब ठिकाने लगे हैं सुना है वो हमें भुलाने लगे है तो क्या हम उन्हे याद आने लगे है हटाए थे जो राह से दोस्त…

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