सर्दी आई - सफ़दर हाश्मी
सर्दी आई सर्दी आई, सर्दी आई ठंड की पहने वर्दी आई। सबने लादे ढेर से कपड़े चाहे दुबले, चाहे तगड़े। नाक सभी की लाल हो गई सुकड़ी सबकी चाल हो गई। ठिठुर रहे हैं, कांप रहे हैं दौड़ रहे हैं, हांप रहे हैं। धूप में दौड़ें तो भी सर्दी छाओं में बैठ…