zahir-ali-siddiqui

हर गीत में... - ज़हीर अली सिद्दीक़ी

हर गीत में भूलकर मतभेद को, मिलाप का पैग़ाम दूँ। अहंकार का संहार कर, विनम्रता और प्यार दूँ। सीखकर हर हार से, विजयी उदघोष कर दूँ। त्याग दूँ तनाव को, शक्ति का संचार भर दूँ। दूरी बनाऊँ गुरूर से, नादानी से तोबा करूँ। हर एक बूँद नेत्र की, लोग…

कैसा पत्रकार हूँ? - ज़हीर अली सिद्दीक़ी

कैसा पत्रकार हूँ? कैसा पत्रकार हूँ? आयामों से दूर खड़ा वाहवाही की ताल और चाटुकारिता की धुन से बैताला बन चुका हूँ अज्ञानता के भँवर में काले करतूतों का हवाला बन चुका हूँ।। बार बार भूल जाता हूँ समाज के निग़ाह को जो निगरानी नही सम्प्रेषण का ज…

क़िरदार है मेरी - ज़ाहिर अली सिद्दीकी

क़िरदार है मेरी मैं प्रेमी तू प्यार है मेरी नायक मै क़िरदार है मेरी मै शायर अल्फ़ाज़ है मेरी मैं रागी तू राग है मेरी।। मै घायल तू कराह है मेरी, मूरत मै मूर्तिकार है मेरी नाविक मैं पतवार है मेरी मैं दरिया तू बहाव है मेरी।। मैं अंधा तू आँख है म…

रोटी - ज़ाहिर अली सिद्दीकी

रोटी - ज़ाहिर अली सिद्दीकी रोटी नभ में पर नभचर नही थलचर, नभचर बन गिद्ध के माफ़िक़ दिख रहे हैं मंडरा भी रहे पैनी निग़ाह लिए परन्तु गिद्ध नही गिद्ध तो मृतकों को नोचते हैं ये तो मरणशैय्या पर लिटा देते हैं मज़बूरों, लाचारों को अपने चंगुल में फँसा ले…

विडम्बना - ज़ाहिर अली सिद्दीकी

विडम्बना बादल देख प्रसन्न हो जाता खुशी के आँसू बहाता है बिन बारिश भी फसल उगाये कर्ज़ तले दब जाता है। खुश हो जाता अन्न उगाकर भूखा वही सो जाता है चिंता में फँसकर अक्सर मौत के मुँह चढ़ जाता है। खुशी-खुशी जो औरों का रहने का ठिकाना बनाता है बा…

Load More
That is All
preload preload preload preload preload