परवाज में कुछ है, कुछ पर तोल रहे है - बिस्मिल भरतपुरी
परवाज में कुछ है, कुछ पर तोल रहे है परवाज में कुछ है, कुछ पर तोल रहे है, उड़ जायेंगे पंछी जो यहाँ बोल रहे है | करते है तुझे याद, जो ले-ले के तेरा नाम, हमराज़ ही सब राज़ तेरा खोल रहे है | साथी तो पहुच भी गए मंजिल पे कभी के, हम है कि अभी शाख प…