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दिल पे मुश्किल है बहुत दिल की कहानी लिखना - कुंवर बेचैन

दिल पे मुश्किल है बहुत दिल की कहानी लिखना दिल पे मुश्किल है बहुत दिल की कहानी लिखना जैसे बहते हुए पानी पे हो पानी लिखना कोई उलझन ही रही होगी जो वो भूल गया मेरे हिस्से में कोई शाम सुहानी लिखना आते जाते हुए मौसम से अलग रह के ज़रा अब के ख़त में…

एक खुशबू के महल में बंद हूँ - कुंवर बेचैन

एक खुशबू के महल में बंद हूँ एक खुशबू के महल में बंद हूँ मै किसी शतदल कमल में बंद हूँ जिसमे केवल प्यार, केवल प्यार है आजकल ऐसी ग़ज़ल में बंद हूँ जिंदगी बोली, दू धोखा क्या तुझे मै तो खुद ही एक छल में बंद हूँ रुक के आना मेरे होठों पर हँसी मै अ…

आँख ग़ायब हैं कान गायब हैं - कुँअर बेचैन

आँख ग़ायब हैं कान गायब हैं आँख गायब हैं, कान गायब हैं शोर तो है, बयान गायब हैं कोई क़ातिल को कैसे पहचाने उँगलियों के निशान गायब हैं हम तो कब से खड़े हैं मन्दिर में देवताओं के ध्यान गायब हैं सिर्फ़ दीवार, सिर्फ़ दीवारें शहर से अब मकान गायब हैं …

मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यों डर रखूँ - कुंवर बेचैन

मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यों डर रखूँ मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यों डर रखूँ जिन्दगी आ, तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ जिसमें माँ और बाप की सेवा का शुभ संकल्प हो चाहता हूँ मैं भी काँधे पर वही काँवर रखूँ हाँ, मुझे उड़ना है लेकिन इसका …

इस नए माहौल में जो भी जिया बीमार है - कुंवर बेचैन

इस नए माहौल में जो भी जिया बीमार है इस नए माहौल में जो भी जिया बीमार है जिस किसी से भी नया परिचय किया बीमार है हंस रही है कांच के कपडे पहनकर बिजलियाँ उसको क्या मालूम मिट्टी का दिया बीमार है आज शब्दों की सभा में एक ये ही शोर था सुर्ख है क्यो…

जनक छंद के भेद - महावीर उत्तरांचली

जनक छंद के भेद जनक छंद की साधना ज्यों वामन का त्रिपुर को तीन चरण में नापना इस जनक छंद में डॉ० ब्रह्मजीत गौतम जी ने छंद की पूरी व्याख्या ही कर डाली है। मात्र तीन चरणों के मेल या तुक विधान का नाम जनक छंद नहीं है, वरन यह उतना ही दु:साध्य यत्न है…

जब मेरे घर के पास कही भी नगर न था - कुंवर बेचैन

जब मेरे घर के पास कही भी नगर न था जब मेरे घर के पास कही भी नगर न था तो इस तरह राह में लूटने का डर न था जंगल में जंगलो की तरह का सफर न था सूरत में आदमी की कोई जानवर न था आंसू-सा गिर के आँख-से मै सोचता रहा इतना तो अपने आप से मै बेखबर न था …

दोनों ही पक्ष आये है तैयारियों के साथ - कुंवर बेचैन

दोनों ही पक्ष आये है तैयारियों के साथ दोनों ही पक्ष आये है तैयारियों के साथ कुछ गर्दनो के साथ है कुछ आरियो के साथ बोया न कुछ भी, फसल मगर ढूंढते है लोग कैसा मजाक चल रहा है क्यारियों के साथ तुम ही बताओ कैसे उसे मै चुरा के लाऊ पानी की वो जो बूं…

नींद के पाँव पे पत्थर बन के आते है ख्वाब - कुंवर बेचैन

नींद के पाँव पे पत्थर बन के आते है ख्वाब नींद के पाँव पे पत्थर बन के आते है ख्वाब जख्म देते है उन्हें और टूटते जाते है ख्वाब आप चाहे तो हमारी पुतलियो से पूछ लों हमने यादो की रुई से रात भर काते है ख्वाब नर्म चेहरे और उन पर सख्त चोटों के निशा…

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