जुबां की, जात की, न मज़हब की बात करिये - अरमान खान
जुबां की, जात की, न मज़हब की बात करिये जुबां की, जात की, न मज़हब की बात करिये, जो करनी है सियासत, तो सब की बात करिये... तुम पढ़े लिखे हो मियाँ, तुम्ही जानों सो खुदा, हम अनपढो से बस, एक रब की बात करिये... ख्वाब सब के है एक जैसे, तो क्यों न ऐ संस…