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ईंटें - नरेश सक्सेना

ईंटें तपने के बाद वे भट्टे की समाधि से निकलीं और एक वास्तुविद के स्वप्न में विलीन हो गईं घर एक ईंटों भरी अवधारणा है जी बिल्कुल ठीक सुना आपने मकान नहीं घर जैसे घर में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता सभी लोग करते हैं सब तरह के काम एकदम ईंटों की त…

पानी क्या कर रहा है - नरेश सक्सेना

पानी क्या कर रहा है आज जब पड़ रही है कड़ाके की ठंड और पानी पीना तो दूर उसे छूने से बच रहे हैं लोग तो जरा चल कर देख लेना चाहिए कि अपने संकट की इस घड़ी में पानी क्या कर रहा है अरे! वह तो शीर्षासन कर रहा है सचमुच झीलों, तालाबों और नदियों का प…

भूख - नरेश सक्सेना

भूख भूख सबसे पहले दिमाग़ खाती है उसके बाद आँखें फिर जिस्म में बाक़ी बची चीज़ों को छोड़ती कुछ भी नहीं है भूख वह रिश्तों को खाती है माँ का हो बहन या बच्चों का बच्चे तो उसे बेहद पसंद हैं जिन्हें वह सबसे पहले और बड़ी तेज़ी से खाती है बच्चों…

शिशु - नरेश सक्सेना

शिशु - नरेश सक्सेना शिशु लोरी के शब्द नहीं संगीत समझता है बाद में सीखेगा भाषा अभी वह अर्थ समझता है समझता है सबकी मुस्कान सभी के अल्ले ले ले ले तुम्हारे वेद पुराण कुरान अभी वह व्यर्थ समझता है अभी वह अर्थ समझता है समझने में उसको, तुम हो …

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