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ज़िंदगी से डरते हो - नून मीम राशिद

ज़िंदगी से डरते हो ज़िंदगी से डरते हो! ज़िंदगी तो तुम भी हो ज़िंदगी तो हम भी हैं! ज़िंदगी से डरते हो? आदमी से डरते हो आदमी तो तुम भी हो आदमी तो हम भी हैं आदमी ज़बाँ भी है आदमी बयाँ भी है उस से तुम नहीं डरते! हर्फ़ और मअनी के रिश्ता-हा-ए-आह…

निकलो न बेनकाब, ज़माना खराब है - नून मीम राशिद

निकलो न बेनकाब, ज़माना खराब है बेपर्दा नज़र आयी कल जो चन्द बीबियां अकबर ज़मीं में गैरत-ए-क़ौमी से गड़ गया पूछा जो मैने आप का पर्दा वो क्या हुआ कहने लगीं के अक़्ल पे मर्दों के पड़ गया निकलो न बेनकाब, ज़माना खराब है और इसपे ये शबाब, ज़माना खराब है स…

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