bewafai

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की - परवीन शाकिर

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की उस ने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की वो कहीं भी गया लौटा तो मिरे पास आया बस यही बात है अच्छी मिरे हरजाई की …

यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं - मजरूह सुल्तानपुरी

यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं हैं ज़माने में अजब चीज़ मोहब्बत वाले दर्द ख़ुद बनते हैं ख़ुद अपनी दवा होते हैं हाल-ए-दिल मुझ से न पूछो मिरी नज़रें दे…

साया गुलदान में कम है कि शजर में कम है? - चराग़ शर्मा

साया गुलदान में कम है कि शजर में कम है ? साया गुलदान में कम है कि शजर में कम है ? कौन सा लुत्फ़ है घर में जो सफ़र में कम है सब्र अच्छा है मगर एक दफ़ा देख तो ले रात ही है कि उजाला तिरे घर में कम है बेवफ़ा कह तो रहा हूँ उसे पूरे दिल से पर ये ल…

उफ़ कहां लाई ये बेज़ारी हमें - रेख़्ता पटौलवी

उफ़ कहां लाई ये बेज़ारी हमें उफ़ कहां लाई ये बेज़ारी हमें जीती बाज़ी लगती है हारी हमें ख़त्म करना है सितमगारी हमें हौसला दे रहमते बारी हमें जानते हैं सब कि अच्छी शय नहीं क्यों पसंद है फिर अदाकारी हमें बेवफ़ा कहते हैं हमको बेवफ़ा कोई सिखला…

अजीब ढंग हैं अबके बहार आने के - रेख़्ता पटौलवी

अजीब ढंग हैं अबके बहार आने के अजीब ढंग हैं अबके बहार आने के चमन में चार सू चर्चे हैं घर जलाने के वो तेज़ आँधी गुलिस्ताँ में अबकी बार चली के तिनके भी ना रहे मेरे आशियाने के तू बवफा भी रहा और कभी वफा भी ना की मैं सद्क़े जाऊं तेरे इस हसीं बहाने …

इश्क़ की गहराइयों में रास्ता मिलता नहीं - मिलन साहिब

इश्क़ की गहराइयों में रास्ता मिलता नहीं इश्क़ की गहराइयों में रास्ता मिलता नहीं, चाह जिसकी दिल में हो वो बेवफा मिलता नहीं। मुश्किलें अम्बार तब लगती हैं अपने आप को, जब कहीं से मनमुताबिक मशवरा मिलता नहीं। चार दिन की जिंदगी में सब्र कोई क्या करे, …

सारे जहाँ में कोई, हमदम नहीं हमारा - निज़ाम फतेहपुरी

सारे जहाँ में कोई, हमदम नहीं हमारा ग़ज़ल- 221 2122 221 2122 अरकान-मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन सारे जहाँ में कोई, हमदम नहीं हमारा हमदर्द बन के आख़िर, सब ने किया किनारा नादान दिल को मेरे, धोखा दिया उन्होंने जिनका था ज़िंदगी में, हमको फक़त सहारा…

जिनके ज़ुल्मों को हम सह गए - मोहित नेगी मुंतज़िर

जिनके ज़ुल्मों को हम सह गए जिनके ज़ुल्मों को हम सह गए वो हमें बेवफ़ा कह गए। ख़्वाब वो मिलके देखे हुए आंसुओं में सभी बह गए। तुम न आये नज़र दूर तक राह हम देखते रह गए। रो पड़ा गांव में जा के मैं मेरे पुश्तैनी घर ढह गए। जिंदगी के हर इक मोड़…

वफ़ा पर कहे गए शेर

वफ़ा पर कहे गए शेर वो शेर जिनमे वफ़ा का ज़िक्र है या यूँ कहे वफ़ा पर कहे गए शेर इश्क करना, नहीं आसान, बहुत मुश्किल है छाती पत्थर की है उनकी, जो वफ़ा करते है - मीर तक़ी मीर हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद जो नहीं जानते वफ़ा क्या है - मिर्ज़ा ग़ालिब मै …

अच्छी तरह ज़रा मुझे पहचान ज़िंदगी - हफीज़ मेरठी

अच्छी तरह ज़रा मुझे पहचान ज़िंदगी अच्छी तरह ज़रा मुझे पहचान ज़िंदगी इंसान हूँ मैं हज़रते -इन्सान ज़िंदगी पहने हुए है रेशमो-कमख़्वाब का क़फ़न याराने-बेज़मीर की बेजान ज़िंदगी गैरों से पूछती है तरीक़ा नजात का अपनों की साजिशों से परीशान ज़िंदगी मनमानि…

दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले - कैफ़ भोपाली

दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले हमको तोहफे ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले हम तरसते ही, तरसते ही, तरसते ही रहे, वो फलाने से, फलाने से, फलाने से मिले खुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता, क्य…

दर्द-ए-दिल दर्द आशना जाने - बहादुर शाह ज़फ़र

दर्द-ए-दिल दर्द आशना जाने दर्द-ए-दिल दर्द आशना जाने और बेदर्द कोई क्या जाने जुल्फ तेरी है वह बला काफ़िर पूछ मुझसे तेरी बला जाने बेवफा जाने क्या वफ़ा मेरी बावफा हो तो वह वफ़ा जाने कर दिया एक निगाह में बेखुद चश्म काफ़िर है क्या खुदा जाने सरफर…

बेवफा रास्ते बदलते है - बशीर बद्र

बेवफा रास्ते बदलते है बेवफा रास्ते बदलते है हमसफ़र साथ चलते है किसके आसू छिपे है फूलो में चूमता हूँ तो होठ जलते है उसकी आँखों को गौर से देखो मंदिरों में चराग जलते है दिल में रहकर नजर नहीं आते ऐसे कांटे कहा निकलते है एक दीवार वो भी शीशे …

न रवा कहिये न सजा कहिये - दाग़ देहलवी

न रवा कहिये न सजा कहिये न रवा कहिये न सजा कहिये कहिये कहिये मुझे बुरा कहिये दिल में रखने की बात है ग़म-ए-इश्क इस को हरगिज़ न बरमला कहिये वो मुझे क़त्ल कर के कहते है मानता ही न था ये क्या कहिये आ गई आप को मसीहाई मरने वालो को मरहबा कहिये ह…

मुझसे जो मोहब्बत करोगे तो क्या पाओगे - देवेन्द्र देव

मुझसे जो मोहब्बत करोगे तो क्या पाओगे मुझसे जो मोहब्बत करोगे तो क्या पाओगे कुछ यूँ अपना दिल तोड़ोगे कि बिखर जाओगे हमने क्या पाया है अब तक वफ़ा करके तुम भी सिर्फ वफ़ा-ऐ-दर्द लेकर चले जाओगे बिखरा हूँ में कुछ इस तरह, कि न करो समेटने की जहमत कही अन…

That is All
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