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नज़र के सामने कुछ अक्स झिलमिलाए बहुत - मख्मूर सईदी

नज़र के सामने कुछ अक्स झिलमिलाए बहुत नज़र के सामने कुछ अक्स झिलमिलाए बहुत हम उनसे बिछड़े तो दिल में ख्याल आए बहुत थी उनको डूबता सूरज से निस्बते कैसी ढली जो शाम तो कुछ लोग याद आए बहुत ये ढलती रात, ये पलके झपकाता सन्नाटा गए दिनों के फ़साने हमें …

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