sadanand-shahi

आज फिर हिंदी दिवस है - सदानंद शाही

आज फिर हिंदी दिवस है हिंदी को प्यार की सत्कार की उपकार की भाषा बताने का दिवस है हिंदी को शृंगार की ओज की शौर्य की भाषा बताने का दिवस है हिंदी को ज्ञान की विज्ञान की सम्मान की भाषा बताने का दिवस है हिंदी को आन-बान-शान की सरकार …

हिंदी दिवस मनाइए - सदानंद शाही

हिंदी दिवस मनाइए हिंदी दिवस मनाइए हिंदी के गुन गाइए लेकिन कुछ ऐसा भी कीजिए जिससे केवल हिंदी-दिवस को ही नहीं बाक़ी दिन भी हिंदी के दिन फिरें दिवस-अवसान से मुक्त हो हिंदी हिंदी के दिन बहुराइए। - सदानंद शाही Hindi diwas manaiye Hindi diwas…

हे मेरी कविता! मुझे माफ़ कर देना - सदानंद शाही

हे मेरी कविता! मुझे माफ़ कर देना हे मेरी कविता! मुझे माफ़ कर देना मैं तुम्हें बस काग़ज़ की नाव पर बैठा कर छोड़ आया हूँ महासागर में बिल्कुल निहत्था कि ज़रा अरब सागर की लहरों का हाल-चाल ले लेना वहाँ इतना हाहाकार क्यों है कि देख लेना प्रशां…

जो हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं - सदानंद शाही

जो हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं टूट चुका है रथ कीचड़ में धँस गए हैं पहिए लहूलुहान आत्मा पर बाणों की बारिश जारी है फँसे हुए पहिए और धँसे हुए बाणों को निकालने तक का अवकाश नहीं है युद्ध और प्यार में सब कुछ को जायज़ मानने वाले किसी नियम या नैत…

Load More
That is All
preload preload preload preload preload