पांच तारा होटलों से घर मिले - ज़हीर कुरैशी
पांच तारा होटलों से घर मिले पांच तारा होटलों से घर मिले जिनमे सुविधाओ के आडम्बर मिले जगंलो की घुप अँधेरी रात में जुगनुओ के क़ाफ़िले अन्क्सर मिले अपना स्वर वो बेच आये थे कही एक चुप की झील के भीतर मिले एक ही दफ्तर में सौ-दो=सौ गुना वेतनो के ब…