निर्मला (उपन्यास) (भाग 23) - मुंशी प्रेमचंद
निर्मला (उपन्यास) - मुंशी प्रेमचंद भाग 23 अनुक्रम पिछला भाग दिन गुज़रने लगे। एक महीना पूरा निकल गया; लेकिन मुन्शी जी न लौटे। कोई ख़त भी नहीं भेजा। निर्मला को अब नित्य यही चिन्ता बनी रहती कि वह लौट कर न आए तो क्या होगा? उसे इसकी चिन्ता न होती थी क…