गुलिस्ता की हद तोड़ पाए तो जानू - पूनम कौसर
गुलिस्ता की हद तोड़ पाए तो जानू गुलिस्ता की हद तोड़ पाए तो जानू महक मेरे घर तक भी आए तो जानू सुबह वक्त सूरज को सब पूजते है कोई शाम को सर झुकाए तो जानू तू माहिर है ! हसते हुए को रुला दे जो रोते हुए को हसाए तो जानू कड़ी धुप में छाँव होती है कै…