अपनी लाश का बोझ उठाऊँ, नामुमकिन - अमन चांदपुरी
अपनी लाश का बोझ उठाऊँ, नामुमकिन अपनी लाश का बोझ उठाऊँ, नामुमकिन मौत से पहले ही मर जाऊँ, नामुमकिन दुनिया ने इतने खानों में बाँट दिया फिर ख़ुद को यकजा कर पाऊँ, नामुमकिन अपने दिल की बात तो मैं कह सकता हूँ उसके दिल की बात बताऊँ, नामुमकिन दुन…