माना कि ज़िंदगी से हमें कुछ मिला भी है - इक़बाल अज़ीम
माना कि ज़िंदगी से हमें कुछ मिला भी है माना कि ज़िंदगी से हमें कुछ मिला भी है इस ज़िंदगी को हम ने बहुत कुछ दिया भी है महसूस हो रहा है कि तन्हा नहीं हूँ मैं शायद कहीं क़रीब कोई दूसरा भी है क़ातिल ने किस सफ़ाई से धोई है आस्तीं उस को ख़बर नहीं…