makhanlal-chaturvedi

लड्डू ले लो - माखनलाल चतुर्वेदी

लड्डू ले लो ले लो दो आने के चार लड्डू राज गिरे के यार यह हैं धरती जैसे गोल ढुलक पड़ेंगे गोल मटोल इनके मीठे स्वादों में ही बन आता है इनका मोल दामों का मत करो विचार ले लो दो आने के चार। लोगे खूब मज़ा लायेंगे ना लोगे तो ललचायेंगे मुन्नी, ल…

पुष्प की अभिलाषा - माखनलाल चतुर्वेदी

पुष्प की अभिलाषा चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ। चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ॥ चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊँ। चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ, भाग्य पर इठलाऊँ॥ मुझे तोड़ लेना वनमाली। उस प…

पूरी नहीं सुनोगे तान - माखनलाल चतुर्वेदी

पूरी नहीं सुनोगे तान किस प्रकार घड़ियाँ गिनता हूँ दिन के बरस बनाता हूँ खान-पान की ज्ञान-ध्यान की धूनी यहाँ रमाता हूँ। तुमको आया जान, वायु में बाँहों को फैलाता हूँ चरण समझते हुए सीखचों पर मैं शीश झुकाता हूँ। सुध-बुध खोने लगे, कहो क्या पू…

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