अपनी शताब्दी के नाम - दूधनाथ सिंह
अपनी शताब्दी के नाम दिन पर दिन बादलों की गुहार में दुबलाता रोहिणी की तपन का सिंगार, पथरीले लाल गुलाबों के बिस्तर पर - सिरहाने गोरी शबनम का दुःस्वप्न... दिन पर दिन। मुझे भोर की उँगलियों में बारिश की बूँद-रस्सियों से लपेटती अपनी दुविधाओं से …