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इश्क़ की अंजुमन की बात करें - हैदर अली जाफ़री

इश्क़ की अंजुमन की बात करें इश्क़ की अंजुमन की बात करें फिर किसी गुल-बदन की बात करें भूल भी जाएँ तीरगी-ए-हयात मुस्कुराती किरन की बात करें इस जहाँ से ख़िज़ाँ का दौर गया लहलहाते चमन की बात करें क्या ज़रूरी है जू-ए-शीर की बात क्यूँ न गंग-ओ-ज…

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