राम की जल समाधि - भारत भूषण
राम की जल समाधि पश्चिम में ढलका सूर्य उठा वंशज सरयू की रेती से, हारा-हारा, रीता-रीता, निःशब्द धरा, निःशब्द व्योम, निःशब्द अधर पर रोम-रोम था टेर रहा सीता-सीता। किसलिए रहे अब ये शरीर, ये अनाथ मन किसलिए रहे, धरती को मैं किसलिए सहूँ, धरती मुझको क…