salam-machhli-shahri

उफ़ ये गर्मी - सलाम मछली शहरी

उफ़ ये गर्मी - सलाम मछली शहरी उफ़ ये गर्मी दय्या रे दय्या लू है कि बिजली दय्या रे दय्या जलता है कमरा भय्या रे भय्या खोल दो पंखा भय्या रे भय्या धूप की शिद्दत बाजी रे बाजी ठंडा शर्बत बाजी रे बाजी गर्मी का आलम तौबा रे तौबा आग का मौसम त…

सड़क बन रही है - सलाम मछली शहरी

सड़क बन रही है मई के महीने का मानूस मंज़र गरीबो के साथी ये कंकर ये पत्थर वह शहर से एक ही मील हटकर सड़क बन रही है ज़मीं पर कुदालो को बरसा रहे है पसीने-पसीने हुए जा रहे है मगर इस मुशक्कत में भी गा रहे है सड़क बन रही है मुसीबत है, कोई मुसर्रत नहीं…

Load More
That is All
preload preload preload preload preload