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वीर तुम बढ़े चलो - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

वीर तुम बढ़े चलो वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो! हाथ में ध्वजा रहे, बाल दल सजा रहे ध्वज कभी झुके नहीं, दल कभी रुके नहीं वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो! सामने पहाड़ हो, सिंह की दहाड़ हो तुम निडर डरो नहीं, तुम निडर डटो वहीं वीर तुम ब…

मन के हारे हार सदा रे, मन के जीते जीत - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

मन के हारे हार सदा रे, मन के जीते जीत मन के हारे हार सदा रे, मन के जीते जीत, मत निराश हो यों, तू उठ, ओ मेरे मन के मीत! माना पथिक अकेला तू, पथ भी तेरा अनजान, और जिन्दगी भर चलना इस तरह नहीं आसान। पर चलने वालों को इसकी नहीं तनिक परवाह, बन जाती …

उठो धरा के अमर सपूतों - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

उठो धरा के अमर सपूतों उठो धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है, नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-…

मुन्ना-मुन्नी ओढ़े चुन्नी - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

मुन्ना-मुन्नी ओढ़े चुन्नी मुन्ना-मुन्नी ओढ़े चुन्नी, गुड़िया खूब सजाई किस गुड्डे के साथ हुई तय इसकी आज सगाई मुन्ना-मुन्नी ओढ़े चुन्नी, कौन खुशी की बात है, आज तुम्हारी गुड़िया प्यारी की क्या चढ़ी बरात है! मुन्ना-मुन्नी ओढ़े चुन्नी, गुड़िय…

चल मेरी ढोलकी ढमाक-ढम - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

चल मेरी ढोलकी ढमाक-ढम चल मेरी ढोलकी ढमाक-ढम, नानी के घर जाते हम। चल मेरी ढोलकी ढमाक-ढम नहीं रुकेंगे कहीं भी हम! चल मेरी ढोलकी ढमाक-ढम, दूध मलाई खाएँगे हम। चल मेरी ढोलकी ढमाक-ढम, मोटे होकर आएँगे हम। - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी chal meri d…

चंदा मामा, आ जाना - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

चंदा मामा, आ जाना चंदा मामा, आ जाना, साथ मुझे कल ले जाना। कल से मेरी छुट्टी है ना आये तो कुट्टी है। चंदा मामा खाते लड्डू, आसमान की थाली में। लेकिन वे पीते हैं पानी आकर मेरी प्याली में। चंदा देता हमें चाँदनी, सूरज देता धूप। मेरी अम्मा मुझ…

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