जहाँ कहीं भी हो तेरी ख़ुशी ज़रूरी है - ख़ुर्रम ताहिर
जहाँ कहीं भी हो तेरी ख़ुशी ज़रूरी है जहाँ कहीं भी हो तेरी ख़ुशी ज़रूरी है ये कब कहा तिरी मौजूदगी ज़रूरी है ये मसअला भी फ़क़त आदमी के साथ है दोस्त कि जो नहीं है मयस्सर वही ज़रूरी है मोहब्बतों में सभी कुछ नहीं है ख़ामोशी कभी कभार तो इज़हार भी …