samar-pradeep

कश्ती - समर प्रदीप

कश्ती ये बात समझने में बहुत देर हो गई तुझे किसी और के साथ चलना था सियाह रात में कई ख़्वाब बुन लिए ख़्वाब जिन्हें कहाँ मुकम्मल होना था खाली कमरे में अब तेरी सदा ढूंढता हूँ ज़ख़्म-ए-दिल-ओ-जां की दवा ढूंढता हूँ बर्फ़ की मानिंद वक़्त भी पिघल रहा है औ…

एक मंजर जो धुँआ होता हुआ - समर प्रदीप

एक मंजर जो धुँआ होता हुआ एक मंजर जो धुँआ होता हुआ शम्अ-ए-उम्मीद ले जाता हुआ लौटना पड़ता है इक तय वक़्त पे शाम फिर ढ़ल जाएगा ढ़लता हुआ जो अना को ताक पर रख के मिले ख़ुश होता हूँ मैं उसे मिलता हुआ फूंक के रखता है जो हर इक कदम चाल चलता है बहुत बरत…

कश्ती पर ऐसा भार न हो - समर प्रदीप

कश्ती पर ऐसा भार न हो कश्ती पर ऐसा भार न हो जिससे ये दरिया पार न हो टूटो तो इतना ही टूटो जितने से दिल बीमार न हो फूल बिछाओ राह में उस की याद रहे कोई ख़ार न हो ग़लती हो भी तो ऐसी हो ग़लती वो जो हर बार न हो तामीर करो घर घर जैसा घर वो जिस म…

मिरी नज़र में कोई कम नज़र नहीं - समर प्रदीप

मिरी नज़र में कोई कम नज़र नहीं मिरी नज़र में कोई कम नज़र नहीं हाँ आपको लगा होगा मगर नहीं हरिक हुनर सिखाऊंगा बेटे को पर फ़रेब देने वाला इक हुनर नहीं सहम गया है बच्चा इस सवाल पर किताब में ये क्यूँ तिरे कवर नहीं पेशानी चूमने वाले वो लड़के ने सुना…

मुझे हिस्सा नहीं बनना कहानी का - समर प्रदीप

मुझे हिस्सा नहीं बनना कहानी का मुझे हिस्सा नहीं बनना कहानी का जहाँ राजा न हो पाता हो रानी का रवानी आएगी हर शे'र में मेरे करूँगा जिक़्र जब मैं इक दिवानी का कोई तो खोल दो के उस को उड़ना है लगी जंजीर पैरों में गुलामी का सियासी लोग इसको बांट…

जो कहीं भी कभी भी ठहरता नहीं - समर प्रदीप

जो कहीं भी कभी भी ठहरता नहीं जो कहीं भी कभी भी ठहरता नहीं उसका कोई कहीं भी ठिकाना नहीं जिसे तुमने ही ख़ुद से जुदा कर दिया वो तो फिर अब किसी का भी प्यारा नहीं तक रहा है समंदर के जानिब जो अब उससे ज़्यादा तो कोई पियासा नहीं ख़ुद गुनाहों पे पर्दा…

Load More
That is All
preload preload preload preload preload