bhartendu-harishchandra

जहाँ देखो वहाँ मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है - भारतेंदु हरिश्चंद्र

जहाँ देखो वहाँ मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है जहाँ देखो वहाँ मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है उसी का सब है जल्वा जो जहाँ में आश्कारा है भला मख़्लूक़ ख़ालिक़ की सिफ़त समझे कहाँ क़ुदरत उसी से नेति नेति ऐ यार दीदों ने पुकारा है न कुछ चारा चला लाचार चारों …

गले मुझ को लगा लो ऐ मिरे दिलदार होली में - भारतेंदु हरिश्चंद्र

गले मुझ को लगा लो ऐ मिरे दिलदार होली में गले मुझ को लगा लो ऐ मिरे दिलदार होली में बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में नहीं ये है गुलाल-ए-सुर्ख़ उड़ता हर जगह प्यारे ये आशिक़ की है उमड़ी आह-ए-आतिश-बार होली में गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ …

हरी हुई सब भूमि - भारतेंदु हरिश्चंद्र

हरी हुई सब भूमि बरषा सिर पर आ गई हरी हुई सब भूमि बागों में झूले पड़े, रहे भ्रमण-गण झूमि करके याद कुटुंब की फिरे विदेशी लीग बिछड़े प्रीतमवालियों के सिर पर छाया सोग खोल-खोल छाता चले लोग सड़क के बीच कीचड़ में जूते फँसे जैसे अघ में नीच - भारतेंदु…

चने जोर गरम - भारतेंदु हरिश्चंद्र

चने जोर गरम चने जोर गरम। चने बनावैं घासीराम। जिनकी झोली में दुकान॥ चना चुरमुर चुरमुर बोलै। बाबू खाने को मुंह खोलै॥ चना खावै तौकी मैना। बोलै अच्छा बना चबैना॥ चना खाय गफूरन मुन्ना। बोलै और नहीं कुछ सुन्ना॥ चना खाते सब बंगाली। जिन धोती ढीली …

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