alok-dhanwa

मीर - आलोक धन्वा

मीर - आलोक धन्वा मीर पर बातें करो तो वे बातें भी उतनी ही अच्छी लगती है जितने मीर और तुम्हारा वह कहना सब दीवानगी की सादगी में दिल-दिल करना दुहराना दिल के बारे में ज़ोर देकर कहना अपने दिल के बारे में कि जनाब यह वही दिल है जो मीर की गली से …

अचानक तुम आ जाओ - आलोक धन्वा

अचानक तुम आ जाओ इतनी रेलें चलती हैं भारत में कभी कहीं से भी आ सकती हो मेरे पास कुछ दिन रहना इस घर में जो उतना ही तुम्हारा भी है तुम्हें देखने की प्यास है गहरी तुम्हें सुनने की कुछ दिन रहना जैसे तुम गई नहीं कहीं मेरे पास समय कम होता …

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