हर घडी क़यामत थी, ये न पूछ कब गुजरी - ज़हूर नज़र
हर घडी क़यामत थी, ये न पूछ कब गुजरी हर घडी क़यामत थी, ये न पूछ कब गुजरी बस यही गनीमत है, तेरे बाद शब् गुजरी कुंजे-गम में एक गुल भी खिल न सका पूरा इस बला की तेजी से सरसरे-तरब गुजरी तेरे गम की खुशबु से जिस्मो-जा महक उट्ठे सांस की हवा जब भी छू क…