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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फ़त नई नई है शबीना अदीब

ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फ़त नई नई है ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तकल्लुफ़ है गुफ़्तुगू में अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएगी नींद तुम को अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा अभी ये …

तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो - शबीना अदीब

तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो, दिल दुखे जिससे अब ऐसी न कोई बात कहो, रोज़ रोटी के लिए अपना वतन मत छोड़ो, जिसको सींचा है लहू से वो चमन मत छोड़ो, जाके परदेस में चाहत को तरस जाओगे, ऐसी बेलौस मोहब्बत को तरस …

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