बचत - अब्दुल अहद साज़
बचत इन्ही दो से आबाद हर इक का घर है कमाना है फ़न और बचाना हुनर है ये बात आज ही सोचना है ज़रूरी किसे है ख़बर आने वाले दिनों की बुरे वक़्त में काम आएँगे अक्सर रखोगे अगर चार पैसे बचा कर बचत ही से मिल-जुल के बनती है दौलत बचत ही से बढ़ती है मुल्…