सच तो बैठ के खाता है - शारिक़ कैफ़ी
सच तो बैठ के खाता है सच तो बैठ के खाता है झूठ कमा कर लाता है याद भी कोई आता है याद तो रक्खा जाता है जैसे लफ़्ज़ हों वैसा ही मुँह का मज़ा हो जाता है फिर दुश्मन बढ़ जाएँगे किस को दोस्त बनाता है कैसी ख़ुश्क हवाएँ हैं सुब्ह से दिन चढ़ जात…