shariq-kaifi

सच तो बैठ के खाता है - शारिक़ कैफ़ी

सच तो बैठ के खाता है सच तो बैठ के खाता है झूठ कमा कर लाता है याद भी कोई आता है याद तो रक्खा जाता है जैसे लफ़्ज़ हों वैसा ही मुँह का मज़ा हो जाता है फिर दुश्मन बढ़ जाएँगे किस को दोस्त बनाता है कैसी ख़ुश्क हवाएँ हैं सुब्ह से दिन चढ़ जात…

मोहब्बत की इंतिहा पर - शारिक़ कैफ़ी

मोहब्बत की इंतिहा पर पापा तुम मर जाओ न पापा मैं तुम से नफ़रत करता हूँ कश तुम लेते हो खाँसी मुझ को आती है दिल के दौरे तुम्हें नहीं मुझ को पड़ते हैं आख़िर कब तक रात में उठ कर लाइट जला कर देखूँगा मैं साँस तुम्हारी कब तक मेरी टीचर मुझ को टोकेगी गुम-…

इक बरस और कट गया 'शारिक़' - शारिक़ कैफ़ी

इक बरस और कट गया 'शारिक़' इक बरस और कट गया 'शारिक़' रोज़ साँसों की जंग लड़ते हुए सब को अपने ख़िलाफ़ करते हुए यार को भूलने से डरते हुए और सब से बड़ा कमाल है ये साँसें लेने से दिल नहीं भरता अब भी मरने को जी नहीं करता - शारिक़ …

हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा - शारिक़ कैफ़ी

हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा किसी ने ख़त नहीं खोला हमारा पढ़ाई चल रही है ज़िंदगी की अभी उतरा नहीं बस्ता हमारा मुआ'फ़ी और इतनी सी ख़ता पर सज़ा से काम चल जाता हमारा किसी को फिर भी महँगे लग रहे थे फ़क़त साँस…

क्यों ये समझू वो अब पराया है - शारिक कैफ़ी

क्यों ये समझू वो अब पराया है क्यों ये समझू वो अब पराया है सिर्फ उसने मुझे गवाया है अब कि जब उसने शहर छोड़ दिया उस गली से गुजरना आया है इक तमाशा हूँ आज सबके लिए उसने इतना मुझे सजाया है उम्र भर जाग कर भी सिर्फ मुझे नींद में आँख मलना आया है …

मेरी बेखुदी का तसलसुल बनाये नहीं रख सका - शारीक़ कैफ़ी

मेरी बेखुदी का तसलसुल बनाये नहीं रख सका मेरी बेखुदी का तसलसुल बनाये नहीं रख सका ज्यादा दिनों तक वो खुद को सजाये नहीं रख सका मै खोया तो इसमें ज्यादा खता भी उसी की ही थी वही भीड़ में मुझ पे आँखे जमाए नहीं रख सका सरे-आईना भी सरापा मेरा धुंध ही धु…

Load More
That is All
preload preload preload preload preload