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चमकीले तारे - अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

चमकीले तारे क्या चमकीले तारे है, बड़े अनूठे, प्यारे है! आँखों में बस जाते है, जी को बहुत लुभाते है! जगमग-जगमग करते है, हँस-हँस मन को हरते है। नए जड़ाऊ गहने है, जिन्हें रात ने पहने है! कितने रंग बदलते है, बड़े दिए-से बलते है! घर के क…

आँख का आँसू - अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध

आँख का आँसू आँख का आँसू ढलकता देख कर जी तड़प करके हमारा रह गया क्या गया मोती किसी का है बिखर या हुआ पैदा रतन कोई नया ।।1।। ओस की बूँदें कमल से हैं कढ़ी या उगलती बूँद हैं दो मछलियाँ या अनूठी गोलियाँ चाँदी मढ़ी खेलती हैं खंजनों की लड़कियाँ ।…

चंदा मामा - अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

चंदा मामा - अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध चंदा मामा, दौड़े आओ दूध कटोरा भरकर लाओ। उसे प्यार से मुझे पिलाओ मुझ पर छिड़क चाँदनी जाओ। मैं तेरा मृग छौना लूँगा उसके साथ हँसूँ-खेलूँगा। उसकी उछल-कूद देखूँगा उसको चाटूँगा, चूमूँगा। - अयोध्या सिंह उपाध…

उठो लाल अब आँखें खोलो - अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

उठो लाल अब आँखें खोलो उठो लाल अब आँखें खोलो, पानी लायी हूँ मुंह धो लो। बीती रात कमल दल फूले, उसके ऊपर भँवरे झूले। चिड़िया चहक उठी पेड़ों पे, बहने लगी हवा अति सुंदर। नभ में प्यारी लाली छाई, धरती ने प्यारी छवि पाई। भोर हुई सूरज उग आया, …

देखो लड़को, बंदर आया - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

देखो लड़को, बंदर आया देखो लड़को, बंदर आया। एक मदारी उसको लाया॥ कुछ है उसका ढंग निराला। कानों में है उसके बाला॥ फटे पुराने रंग बिरंगे। कपड़े उसके हैं बेढंगे॥ मुँह डरावना आँखे छोटी। लंबी दुम थोड़ी सी मोटी॥ भौंह कभी वह है मटकाता। आँखों क…

पी-पी-पी-पी करे पिपहरी - डॉ. अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिओध

पी-पी-पी-पी करे पिपहरी पी-पी-पी-पी करे पिपहरी टन-टन-टन-टन घंटी बोले ठन-ठन-ठन-ठन बजे रुपैया, बछड़ा देखे बां-बां-बां बोले, ठनक-ठनक कर बजे तबला डिम-डिम-डिम डोंडी बोले - डॉ. अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिओध pi-pi-pi-pi kare piphari pi-pi-pi-pi ka…

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