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सख्त हालातों में हम इंसान हो गए
बुरा वक्त निकलते ही हम बेईमान हो गए

जिसको भी देखा तेरी उल्फत के दरवाजे पर
सभी के सभी अब भगवान हो गए

महकते फूलो में खुशबू अब किस काम की
गुलशन जब भंवरो से परेशान हो गए

मेरे जनाजे में वो बात कहा रही होगी
तेरे दर पर लाखो जिस्म जब कुर्बान हो गए

जब रुतबे की बात आयी तो हमने शहर छोड़ दिया
मुझसे काम रुतबे वालों के शहर में मकान हो गए

तड़प दिल की अब किसी को सुने नहीं जाती
मी हबीब ही मुझसे अब परेशान हो गए

उम्र बेत गयी इक महल बनाने में नीरज
आखिरी वक्त में दो पल के मेहमान हो गए - नीरज अहूजा

Roman

Sakht halaato me ham insaan ho gye...
Bura waqt nikalte hi ham baimaan ho gye,

jisko bhi dekha teri ulfat ke darwaje par...
Sabhi ke sabhi ab bhagwaan ho gye,

Mahakte phoolo me khushbu ab kis kaam ki...
Gulshan jab bhawro se pareshaan ho gye,

Mere janaaze me wo baat kaha rhi hogi...
Tere dar par lakho jism jab kurbaan ho gye,

Jab rutbe ke baat aayi to hamne shahar chhod diya...
Mujse kam rutbe walo ke shahar me makaan ho gye,

Tadap dil ki ab kisi ko sunaai nhi jati...
Mere habeeb hi mujse ab pareshaan ho gye,

Umar beet gyi ek mahal bnaane me Neeraj...
Akhiri waqt me do pal ke mehmaan ho gye - Neeraj Ahuja (Nirnkari)
#jakhira
वतन की आग बुझाओ .... वतन की आग बुझाओ
छोड़ के नफरत मिलजुल कर सब होली ईद मनाओ

अबुल कलाम आज़ाद की ये सौगात ना जलने देंगे
मुंबई हो के दिल्ली या गुजरात ना जलने देंगें

बात वतन की आ जाये तो भगत सिंह बन जाओ
वतन की आग बुझाओ .... वतन की आग बुझाओ

बिस्मिल जी के आंचता की आग दहकती होगी
सच है अशफाकुल्ला की रूह तड़पती होगी

अमर शहीदों के गुलशन पर गोले मत बरसाओ
वतन की आग बुझाओ .... वतन की आग बुझाओ

बारूदों के ढेर पे अपना देश अगर जलता है
जलने दो बस काम सियासत का अपना चलता है

ऐसे नेताओ को पहले सरहद पर पहुचाओ
वतन की आग बुझाओ .... वतन की आग बुझाओ - अल्लामा इकबाल

Roman

Watan ki aag bujhao....Watan ki aag bujhao
chhod ke nafrat miljul kar sab holi id manao

abul kalam azad ki ye sougat na jalne denge
Mumbai ho ke Dilli ya Gujrat na jalne denge

baat watan ki aa jaye to bhagat singh ban jao
Watan ki aag bujhao....Watan ki aag bujhao

bismil ji ke aanchta ki aag dahkati hogi
sach hai ashfaqulla ki ruh tadpati hogi

amar shahido ke gulshan par gole mat barsao
Watan ki aag bujhao....Watan ki aag bujhao

barudo ke dher pe apna desh agar jalta hai
jalne do bas kaa siyasat ka apna chalta hai

aise netao ko pahle sarhad par pahuchao
Watan ki aag bujhao....Watan ki aag bujhao - Allama Iqbal
#jakhira
अन्याय,शोषण, भेदभाव को सहना सीख लिया है
पत्थरों की तरह जीना लोगों ने सीख लिया हैं

अंधे,बहरे,गूंगे की तरह ज़ीना सीख लिया है
ज़मीर अपना गिरवी रखना लोगो ने सीख लिया है

रोशनी की एक किरण भी नही रही दिल में
इंसानियत को छोड़ना लोगों ने सीख लिया है

अन्याय,शोषण,भेदभाव की नाइंसाफी को सहते सहते
अपनी इंसानियत को बेचना लोगों ने सीख लिया है

इंसान ने अपने अपने अंदर की कमियों को छोड़कर
दूसरों की कमियो को गिनना लोगों ने सीख लिया है- मुनिकेश सोनी

Roman

anyay, shoshan, bhedbhav ko sahna sikh liya hai
pattharo ki tarah jeena logo ne sikh liya hai

andhe, bahre, gunge ki tarah jeena sikh liya hai
jameer apna girvi rakhana logo ne sikh liya hai

roshni ki ek kiran bhi nahi rahi dil me
insaniyat ko chhodna logo ne sikh liya hai

anyaay, shoshan, bhedbhav ki nainsafi ko sahte sahte
apni insaniyat ko bechna logo ne sikh liya hai

insaaan ne apne andar ki kamiyo ko chhodkar
dusro ki kamiyo ko ginna logo ne sikha liya hai - Munikesh Soni
#jakhira
अपने ख़्वाबों में तुझे जिसने भी देखा होगा
आँख खुलते ही तुझे ढूँढने निकला होगा

ज़िन्दगी सिर्फ़ तेरे नाम से मन्सूब रहे
जाने कितने ही दिमाग़ों ने ये सोचा होगा

दोस्त हम उसको ही पैग़ाम-ए-करम समझेंगे
तेरी फ़ुर्क़त का जो जलता हुआ लम्हा होगा

दामन-ए-ज़ीस्त में अब कुछ भी नहीं है बाक़ी
मौत आयी तो यक़ीनन उसे धोखा होगा

रौशनी जिससे उतर आई लहू में मेरे
ऐ मसीहा वो मेरा ज़ख़्म-ए-तमन्ना होगा-अब्बास अली दाना

Roman

apne khwabo me tujhe jisne bhi dekha hoga
aankh khulte hi tujhe dhundhne laga hoga

zindgi sirf tere naam se mandub rahe
jaane kitne hi dimago ne ye socha hoga

dost ham usko hi paigam-e-karam samjhege
teri furkat ka jo jalta hua lamha hoga

daman-e-jist me ab kuch bhi nahi hai baki
mout aayi to yakinan use dhokha hoga

roushni jisse utar aai lahu me mere
e masiha wo mera jakhm-e-tamnna hoga - Abbas Ali Dana
#jakhira
वो कुछ गहरी सोच में ऐसे डूब गया है
बैठे बैठे नदी किनारे डूब गया है

आज की रात न जाने कितनी लंबी होगी
आज का सूरज शाम से पहले डूब गया है

वो जो प्यासा लगता था सैलाब-जदा था
पानी पानी कहते कहते डूब गया है

मेरे अंदर एक भंवर था जिस में
मेरा सब कुछ साथ ही मेरे डूब गया है

शोर तो यूं उठ्ठा था जैसे इक तूफ़ान हो
सन्नाटे में जाने कैसे डूब गया है

आखिरी ख्वाहिश पूरी कर के जीना कैसा
आनिस भी साहिल तक आ के डूब गया है - आनिस मुईन

Roman

wo kuch gahri soch me aise dub gaya hai
baithe baithe nadi kinare dub gaya hai

aaj ki rat n jane kitni lambi hogi
aaj ka suraj sham se pahle dub gaya hai

wo jo pyasa lagta tha sailab-zada tha
pani pani kahte kahte dub gaya hai

shor to yun uththa tha jaise ik tufan ho
sannate me jane kaise dub gaya hai

aakhiri khwahish puri kar ke jeena kaisa
Anis bhi sahil tak aa ke dub gaya hai - Anis Moin/Muin
#jakhira

युवा शेरो कि पहली किश्त में पहले शायर है नैय्यर इमाम सिद्दीकी जिनकी नज्म अलाव आपके लिए पेश है :

जब से तुम गए हो
कुछ लिख ही नहीं पाता
मेरी ज़िन्दगी कोरे काग़ज़ की तरह हो गयी है
क़लम है के ख़ामोश है
और दिमाग़ कि बस
लफ्ज़ ही ढूँढता रहता है
और दिल
दिल का क्या कहूं
इस में तुम बन के हुक समाई हो
लबों पे हैं एक तवील ख़ामोशी
और आँखों में पसरी है वीरानी
और ख्यालों में
न टूटने वाला सन्नाटा
ऐसा लगता है जैसे
मैं इंसान नही
कोई सुनसान खँडहर हूँ
जो फिर से बसना चाहता है हवेली बन कर
तो
बस इतनी सी इल्तिजा है
लौट आओ मेरी दुनिया में वापस
सर्दी में जलते अलाव की तरह
क्यूंकि
दूर रह के जलने से से अच्छा है कि
पास रह के नफरत की आग को सुलगाये रखें
बोलो
वापस आओगी न? - नैय्यर इमाम सिद्दीकी

Roman

Jab se tum gaye ho
kuch likh nahi pata
meri zindgi kore kagaj ki tarah ho gayi hai
kalam hai ke khamosh hai
aur dimag ki bas
lafz hi dhundhta rahta hai
aur dil
dil ka kya kahu
is me tum ban ke huk samai ho
labo pe hai ek taweel khamoshi
aur aankho me pasri hai veerani
aur khayalo me
n tutne wala sannata
aisa lagta hai jaise
ma inasaan nahi
koi sunsan khandhar hu
jo fir se basna chahta hai haweli bankar
to bas itni si iltija hai
lout aao meri duniya me wapas
sardi me jalte alaav ki tarah
kyuki
door rah ke jalne se achcha hai ki
paas rah ke nafrat ki aag ko sulgaye rakhe
bolo wapas aaogi na? - Naiyyar Imam Siddiqi
#jakhira

नैय्यर इमाम जी रायपुर के रहने वाले है आपसे facebok पर संपर्क किया जा सकता है और आपका मेल एड्रेस है naiyarimam88@gmail.com