तेरी तरफ से हमला होगा ऐसा हमने कब सोचा था
शर्बत इतना कड़वा होगा ऐसा हमने कब सोचा था

आप तो पिछले कई बरस से मिनरल वाटर पीते है
आपका दिल भी गन्दा होगा ऐसा हमने कब सोचा था

छोटी-सी इक बात पे उसने सात समंदर पार किये
उसकी गोद में बच्चा होगा ऐसा हमने कब सोचा था

हम जैसे बज़र्फ़ की कीमत इस बस्ती में कोई नहीं
सोना इतना सस्ता होगा ऐसा हमने कब सोचा था

जिसकी खातिर सारी दुनिया यारो छोड़ के आये है
वह भी इंसा गूंगा होगा ऐसा हमने कब सोचा था - हसीब सोज़

Roman

teri taraf se hamla hoga aisa hamne kab socha tha
sharbat itna kadwa hoga aisa hamne kab socha tha

aap to pichle kai baras se minral watar pete hai
aapka dil bhi ganda hoga aisa hamne kab socha tha

chhoti-si ik baat pe usne saat samndar paar kiye
uski god me bachcha hoga aisa hamne kab socha tha

ham kaise bzarf ki keemat is basti me koi nahi
sona itna sasta hoga aisa hamne kab socha tha

jiski khatir sari duniya yaaro chhod ke aaye hai
wah bhi insa gunga hoga aisa hamne kab socha tha - Haseeb Soz
#jakhira
उसने बिगड के मुझसे कहा बात-बात में
रोते नहीं यु अहले वफ़ा बात बात में

कुछ बात थी जो उसकी जुबां कह न सकी
कुछ सोच-सोच कर वो रुका बात-बात में

उसकी भी चश्म नम हुई दौराने-गुफ्तगू
याद आ गया मुझे भी खुदा बात बात में

इतना ख्याल है कि मेरे सर पे धुप थी
जाने कब आफ़ताब ढला बात बात में

न मंज़र न घर न राह न मंजिल न राहते
सब कुछ किसी ने छीन लिया बात बात में - परवेज वारिस

मायने
अहले-वफ़ा=आशिक़, चश्म=आँख, दौराने-गुफ्तगू=बातचीत के बीच, आफताब=सूरज,

Roman

Usne bigad ke kaha baat baat me
rote nahi yu ahle wafa baat baat me

kuch baat thi jo uski jubaan kah n saki
kuch soch-soch kar wo ruka baat baat me

uski bhi Chashm nam hui dourane-guftgu
yaad aa gaya mujhe bhi khuda baat baat me

itna khyal hai ki mere sar pe dhoop thi
jaane kab aaftab dhala baat baat me

n manzar n ghar, n rah, na manjil, n rahte
sab kuch kisi ne cheen liya baat baat me- Parvez Waris
#jakhira
अच्छी तरह ज़रा मुझे पहचान ज़िंदगी
इंसान हूँ मैं हज़रते -इन्सान ज़िंदगी

पहने हुए है रेशमो -कमख़्वाब का क़फ़न
याराने-बेज़मीर की बेजान ज़िंदगी

गैरों से पूछती है तरीक़ा नजात का
अपनों की साजिशों से परीशान ज़िंदगी

मनमानियों का राज है सारे समाज में
जैसे हो कोई अहद न पैमान ज़िन्दगी

बातिल के इक़्तिदार पे चीं-बर-जबीं नहीं
हक़ के सिपाहियों की तन आसान ज़िंदगी

हमने लिखा है अपने शहीदों के ख़ून से
मक़्तल की दास्तान का उन्वान ज़िंदगी

वो ज़ख़्म हूँ कि जिस पे बड़े एहतिमाम से
ख़ाली करे है अपने नमकदान ज़िंदगी

कमज़र्फ़ मुहसिनों का सताया हुआ हूँ मैं
मुझ पर न कीजियो कोई एहसान ज़िंदगी

मैंने बुरा किया जो तुझको बेवफ़ा कहा
अपने 'हफ़ीज़ का न बुरा मान ज़िंदगी।- हफ़ीज़ मेरठी
मायने
रेशमो-कमख़्वाब= रेशमा का कपड़ा जिस पर कलाबत्तू से बेल बूटे बने होते है, याराने-बेज़मीर=चरित्रहीन, नजात=मुक्ति, आराम चैन की ज़िंदगी, अहद =वचन, पैमान = वादा, बातिल =असत्य झूठ, इक़्तिदार= सत्ता, चीं-बर-जबीं= माथे पर बल पड़ना, अप्रसन्नता ; मक़्तल =वधस्थल; उन्वान =शीर्षक, एहतिमाम=व्यवस्था, कमज़र्फ़ = ओछे, मुहसिनों =उपकार करनेवाले

Roman

Achchi tarah jara mujhe pahchan Zindgi
insan hu mai hajrate-insan zindgi

pahne hue hai reshmo-kamkhwab ka kafan
yarane-bejmeer ki bejan zindgi

gairo se puchti hai tarika najaat ka
apno ki sajisho se pareshan zindgi

manmaniyo ka raz hai sare samaj me
jaise ho koi ahad n paiman zindgi

batil ke iktidar pe chin-bar-zabi nahi
haq ke sipahiyo ki tan asan zindgi

hamne likha hai apne shahido ke khoon se
maqtal ki dastaan ka unwan zindgi

wo jakhm hai ki jis pe bade ehtimam se
khali kare hai apne namakdan zindgi

kamzarf muhsino ka sataya hua hu mai
mujh par n kijiyo koi ehsan zindgi

maine bura kiya jo tujhko bewafa kaha
apne hafeez ka n bura maan zindgi - Hafeez Merthi (Hafeez Meruthi)
कैफ भोपाली साहब का 20 फ़रवरी को जन्म दिवस आता है इस अवसर पर उनकी एक ग़ज़ल पेश है
शायद किसी काबिल ये मिरा सर भी नहीं है
किस्मत में तिरे पाँव कि ठोकर भी नहीं है

माँ कहती है मर जाऊं तो लाएगा कफ़न कौन
या रब! मिरा बेटा अभी नौकर भी नहीं है

तन्हाई में वो भी कभी रो लेते तो होंगे
दिल उनका नहीं फूल तो पत्थर भी नहीं है

क्यों चाँद को कहते है ये शायर तिरा चेहरा
ये तो तिरे तलवों के बराबर भी नहीं है कैफ भोपाली
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Roman

shayad kisi kabil ye mira sir bhi nahi hai
kismat me tire paanv ki thokar bhi nahi hai

maa kahti hai mar jaaun to layega kafan koun
yaa rab! mira beta abhi noukar bhi nahi hai

tanhai me wo bhi kabhi ro lete to honge
dil unka nahi phool to patthar bhi nahi hai

kyo chaand ko kahte hai ye shayar tira chehra
ye to tire talwo ke barabar bhi nahi hai - Kaif Bhopali
#jakhira
कलीम आजिज़ साहब का रविवार (15/02/2015) को हजारीबाग में इंतकाल हो गया खुदा उन्हें जन्नत नसीब करे | आपकी उम्र ९५ साल कि थी इस मौके पर श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी यह गज़ल पेश है
मेरे ही लहू पर गुजर औकात करो हो
मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो

दिन एक सितम, एक सितम रात करो हो
वो दोस्त हो दुश्मन को भी तुम मात करो हो

हम खाक-नशीं तुम सुखन-आरा-ए-सर-ए-बाम
पास आ के मिलो दूर से क्या बात करो हो

यु तो कभी मुंह फेर के देखो भी नहीं हो
जब वक्त पड़े है तो मुदारात करो हो

दामन पे कोई छिट न खंज़र पे कोई दाग़
तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो

बकने भी दो आजिज़ को जो बोले है बके है
दीवाना है दीवाने से क्या बात करो हो - कलीम आजिज़

Roman

mere lahu par gujar aukat karo ho
mujh se hi amiro ki tarah baat karo ho

din ek sitam, ek sitam raat karo ho
wo dost ho dushman ko bhi maat karo ho

ham khaak-nashin tum sukhan-aara-e-sar-e-baam
paas aa ke milo door se kya baat karo ho

yu to kabhi munh fer ke dekho bhi nahi ho
jab waqt pade hai to mudarat karo ho

daaman pe koi chhit n khanzar pe koi daag
tum katl karo ho ki karamat karo ho

bakne bhi do Aajiz ko jo bole hai, bake hai
deewana hai deewane se kya baat karo ho -Kaleem Aajiz
#jakhira
परिंदे हौसला कायम उड़ान में रखना
हर इक निगाह तुझी पर है ध्यान में रखना

बुलंदियां तेरी हिम्मत को आजमाएगी
परों में जान, नज़र आसमान में रखना

हर इम्तिहान पे मंजिल करीब आती है
हमेशा खुद को किसी इम्तिहान में रखना

तू बोलता है तो मिसरी सी घुलती जाती है
यही मिठास हमेशा जबान में रखना

उड़ान भर के तेरी और आ रहा है ये
तू इस परिंदे को अपनी अमान में रखना - मंगल नसीम

Roman

Parinde housla kaayam udaan me rakhna
har ik nigaah tujhi par hai dhyaan me rakhna

bulandiya teri himmat ko ajmayegi
paro me jaan, nazar aasmaan me rakhna

har imtihan pe manjil kareeb aati hai
hamesha khud ko kisi imtihan me rakhna

tu bolta hai to misri si ghulti jati hai
yahi mithas hamesha jabaan me rakhna

udaan bhar ke teri aur aa raha hai ye
tu is parinde ko apni amaan me rakhna - Mangal Naseem
#jakhira