0
पहले सौ बार इधर और उधर देखा है - मजरूह सुल्तानपुरी
पहले सौ बार इधर और उधर देखा है - मजरूह सुल्तानपुरी

पहले सौ बार इधर और उधर देखा है तब कहीं डर के तुम्हें एक नज़र देखा है हम पे हँसती है जो दुनियाँ उसे देखा ही नहीं हम ने उस शोख को ऐ दीदा...

Read more »

0
दर्दे-दिल, दर्दे-वफ़ा, दर्दे-तमन्ना क्या है  - जाँ निसार अख़्तर
दर्दे-दिल, दर्दे-वफ़ा, दर्दे-तमन्ना क्या है - जाँ निसार अख़्तर

दर्दे-दिल, दर्दे-वफ़ा, दर्दे-तमन्ना क्या है आप क्या जानें मोहब्बत का तकाज़ा क्या है बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं आप माने या न माने...

Read more »

0
न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ - मुनव्वर राना
न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ - मुनव्वर राना

न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ ग़ज़ल मै आप बीती को मै जग बीती बनाता हूँ ग़ज़ल वो सिंफे-नाजुक है जिसे अपनी रफाक़त से वो महबूबा बना...

Read more »

0
जश्न-ए-आजादी  - फय्याज ग्वालयरी
जश्न-ए-आजादी - फय्याज ग्वालयरी

आप सभी को जश्ने आज़ादी ( स्वतंत्रता दिवस / Independence Day) की शुभकामनाए | आज़ादी के जश्न पर आप सभी के लिए फय्याज ग्वालियरी साहब की जश्ने-आज़ा...

Read more »

1
उदासियो ने मेरी आत्मा को घेरा है - मीना कुमारी नाज़
उदासियो ने मेरी आत्मा को घेरा है - मीना कुमारी नाज़

मीना कुमारी जी के जन्मदिन के अवसर पर उनकी यह ग़ज़ल पेश है | आशा आप सभी को पसंद आएगी उदासियो ने मेरी आत्मा को घेरा है रुपहली चांदनी है और घु...

Read more »

0
खुश्क मौसम रूत सुहानी ले गया - चाँद शेरी
खुश्क मौसम रूत सुहानी ले गया - चाँद शेरी

चाँद शेरी साहब के जन्मदिन के मौके पर उनकी यह गज़ल पेश है खुश्क मौसम रूत सुहानी ले गया चहचहाती जिंदगानी ले गया मंदिरों का, मस्जिदों का आ...

Read more »

0
मुझसे मत कर यार कुछ गुफ्तार, मै रोज़े से हूँ - ज़मीर जाफ़री
मुझसे मत कर यार कुछ गुफ्तार, मै रोज़े से हूँ - ज़मीर जाफ़री

रमज़ान का पाक़ महीना चल रहा है कुछ दिनों में ईद आ जायेगी इस रमज़ान के मौके पर आप सभी के लिए पकिस्...

Read more »

0
गुनाहगार हूँ उसका जिसपे हरकत उबाल रखा है - अज़हर साबरी
गुनाहगार हूँ उसका जिसपे हरकत उबाल रखा है - अज़हर साबरी

गुनाहगार हूँ उसका जिसपे हरकत उबाल रखा है उकुबत के बावजूद भी सबका ख्याल रखा है हर पहलु को नज़र-अ...

Read more »

0
ऊँचा है पर्वत - अशोक बाबू माहौर
ऊँचा है पर्वत - अशोक बाबू माहौर

  ऊँचा है पर्वत कद उसका ऊँचा न झुका न झुकेगा अटल हैं इरादे विश्वास के अम्बार खड़ा मूक अव...

Read more »
 
 
Top