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अब तो ये भी नहीं रहा एहसास - जिगर मुरादाबादी
अब तो ये भी नहीं रहा एहसास - जिगर मुरादाबादी

अब तो ये भी नहीं रहा एहसास दर्द होता है या नहीं होता इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा आदमी काम का नहीं होता टूट पड़ता है दफ़अ'तन जो...

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चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं  - राज़िक़ अंसारी
चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं - राज़िक़ अंसारी

चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं जहां पर सब बराबर बैठते हैं न जाने क्यों घुटन सी हो रही है बदन से चल के बाहर बैठते हैं हमारी हार का ऐलान ह...

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कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान  - अजमल सुल्तानपुरी
कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान - अजमल सुल्तानपुरी

सभी पाठकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए मुसलमाँ और हिन्दू की जान  कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान  मैं उस को ढूँढ रहा हूँ  म...

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आज़ादी
आज़ादी

शेरों को आज़ादी है आज़ादी के पाबंद रहें जिसको चाहें चीरें फाड़ें खायें पियें आनंद रहें शाहीं को आज़ादी है आज़ादी से परवाज़ करे नन्ही मु...

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हमारा झंडा - मजाज़ लखनवी
हमारा झंडा - मजाज़ लखनवी

शेर हैं चलते हैं दर्राते हुए बादलों की तरह मंडलाते हुए ज़िंदगी की रागिनी गाते हुए आज झंडा है हमारे हाथ में हाँ यह सच है भूक से हैरान ह...

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उसको पढ़ने को जी मचलता है - आदिल लखनवी
उसको पढ़ने को जी मचलता है - आदिल लखनवी

उसको पढ़ने को जी मचलता है, हुस्न उसका किताब जैसा है । तुम चिराग़ों की बात करते हो, हमने सूरज को बुझते देखा है । खाक उड़़कर जमीं पे आत...

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