इश्क़ और मोहब्बत पर कुछ अशआर (शायरी ) भाग -1 | जखीरा, साहित्य संग्रह

इश्क़ और मोहब्बत पर कुछ अशआर (शायरी ) भाग -1

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प्यार, इश्क़, मोहब्बत, प्रेम न जाने क्या क्या नाम दिए गए है इस अहसास/भावना को | और आज ही नहीं जबसे उर्दू शायरी अस्तित्व में आई है तब से हर श...

प्यार, इश्क़, मोहब्बत, प्रेम न जाने क्या क्या नाम दिए गए है इस अहसास/भावना को | और आज ही नहीं जबसे उर्दू शायरी अस्तित्व में आई है तब से हर शायर से अपनी तरह से अपने शब्दों में इस अहसास को मोतियों की तरह शायरी में पिरोया है | हम आपके लिए लाये है इन्ही अशआर का संग्रह | यह जखीरा शायरों को उनके नाम के क्रमवार पेश किया गया है | आशा है आपको पसंद आएगा | पेश है आप सभी के लिए भाग - 1


इश्क और मोहब्बत पर शायरी का भाग 2
मिरे मज़ार पे आ कर दिए जलाएगा
वो मेरे ब'अद मिरी ज़िंदगी में आएगा
- अंजुम ख़याली



किताब-ए-इश्क़ के जो मो'तबर रिसाले हैं
उन्हीं में हुस्न के कुछ मुस्तनद हवाले हैं
- अंजुम बाराबंकवी



मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था
वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था
- अंजुम रहबर



इश्क़ फ़रमा लिया तो सोचता हूँ
क्या मुसीबत पड़ी हुई थी मुझे
- अंजुम सलीमी



उठाए फिरता रहा मैं बहुत मोहब्बत को
फिर एक दिन यूँही सोचा ये क्या मुसीबत है
- अंजुम सलीमी



किस ने आबाद किया है मिरी वीरानी को
इश्क़ ने? इश्क़ तो बीमार पड़ा है मुझ में
- अंजुम सलीमी



चाहत के बदले में हम बेच दें अपनी मर्ज़ी तक
कोई मिले तो दिल का ग्राहक कोई हमें अपनाए तो
- अंदलीब शादानी



इसी तलाश में पहुँचा हूँ इश्क़ तक तेरे
कि इस हवाले से पा जाऊँ मैं दवाम अपना
- अकबर अली खान अर्शी जादह



इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता
- अकबर इलाहाबादी



मेरे हवास इश्क़ में क्या कम हैं मुंतशिर
मजनूँ का नाम हो गया क़िस्मत की बात है
- अकबर इलाहाबादी



मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ
नज़र मिल गई दिल धड़कने लगा
- अकबर इलाहाबादी



मौत आई इश्क़ में तो हमें नींद आ गई
निकली बदन से जान तो काँटा निकल गया
- अकबर इलाहाबादी



इश्क़ की सादा-दिली है हर तरफ़ छाई हुई
बारगाह-ए-हुस्न में हर आरज़ू नौ-ख़ेज़ है
- अकबर हैदरी कश्मीरी



इश्क़ इक ऐसी हवेली है कि जिस से बाहर
कोई दरवाज़ा खुले और न दरीचा निकले
- अकरम नक़्क़ाश



हर इश्क़ के मंज़र में था इक हिज्र का मंज़र
इक वस्ल का मंज़र किसी मंज़र में नहीं था
- अक़ील अब्बास जाफ़री



एक ही अंजाम है ऐ दोस्त हुस्न ओ इश्क़ का
शम्अ भी बुझती है परवानों के जल जाने के ब'अद
- अख़तर मुस्लिमी



मुझ को मंज़ूर नहीं इश्क़ को रुस्वा करना
है जिगर चाक मगर लब पे हँसी है ऐ दोस्त
- अख़तर मुस्लिमी



जब से मुँह को लग गई 'अख़्तर' मोहब्बत की शराब
बे-पिए आठों पहर मदहोश रहना आ गया
- अख़्तर अंसारी



हाँ कभी ख़्वाब-ए-इश्क़ देखा था
अब तक आँखों से ख़ूँ टपकता है
- अख़्तर अंसारी



इक हुस्न-ए-मुकम्मल है तो इक इश्क़-सरापा
होश्यार सा इक शख़्स है दीवाना सा इक शख़्स
- अख़्तर अंसारी अकबराबादी



इश्क़ को नग़्मा-ए-उम्मीद सुना दे आ कर
दिल की सोई हुई क़िस्मत को जगा दे आ कर
- अख़्तर शीरानी



लॉन्ड्री खोली थी उस के इश्क़ में
पर वो कपड़े हम से धुलवाता नहीं
- अख़्तर शीरानी



माना कि तेरे इश्क को दिल से भुला दिया
नक्शे वफ़ा को सीने से अपने मिटा दिया
लेकिन तू मेरी पिछली वफ़ाए भुला न दे
ओ नाज़नी ! खुदा के लिए बद्दुआ न दे
- अख़्तर शीरानी



किसी के तुम हो किसी का ख़ुदा है दुनिया में
मिरे नसीब में तुम भी नहीं ख़ुदा भी नहीं
- अख़्तर सईद ख़ान



ज़माना इश्क़ के मारों को मात क्या देगा
दिलों के खेल में ये जीत हार कुछ भी नहीं
- अख़्तर सईद ख़ान



कभी क़रीब कभी दूर हो के रोते हैं
मोहब्बतों के भी मौसम अजीब होते हैं
- अज़हर इनायती



'नबील' इस इश्क़ में तुम जीत भी जाओ तो क्या होगा
ये ऐसी जीत है पहलू में जिस के हार चलती है
- अज़ीज़ नबील



ऐ सोज़-ए-इश्क़-ए-पिन्हाँ अब क़िस्सा मुख़्तसर है
इक्सीर हो चला हूँ इक आँच की कसर है
- अज़ीज़ लखनवी



मोहब्बत लफ़्ज़ तो सादा सा है लेकिन 'अज़ीज़' इस को
मता-ए-दिल समझते थे मता-ए-दिल समझते हैं
- अज़ीज़ वारसी



हम को सँभालता कोई क्या राह-ए-इश्क़ में
खा खा के ठोकरें हमीं आख़िर सँभल गए
- अज़ीज़ हैदराबादी



हुस्न है दाद-ए-ख़ुदा इश्क़ है इमदाद-ए-ख़ुदा
ग़ैर का दख़्ल नहीं बख़्त है अपना अपना
- अज़ीज़ हैदराबादी



न जाने कौन सी मंज़िल पे इश्क़ आ पहुँचा
दुआ भी काम न आए कोई दवा न लगे
- अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी



बस एक ही बला है मोहब्बत कहें जिसे
वो पानियों में आग लगाती है आज भी
- अजीत सिंह हसरत



हुस्न और इश्क़ हैं दोनों काफ़िर
दोनों में इक झगड़ा सा है
- अज़ीम कुरेशी



'अतहर' तुम ने इश्क़ किया कुछ तुम भी कहो क्या हाल हुआ
कोई नया एहसास मिला या सब जैसा अहवाल हुआ
- अतहर नफ़ीस



इक शक्ल हमें फिर भाई है इक सूरत दिल में समाई है
हम आज बहुत सरशार सही पर अगला मोड़ जुदाई है
- अतहर नफ़ीस



हमारे इश्क़ में रुस्वा हुए तुम
मगर हम तो तमाशा हो गए हैं
- अतहर नफ़ीस



वो इश्क़ जिस की ज़माने को भी ख़बर न रही
तिरे बिछड़ने से रुस्वा नगर नगर में रहा
- अतहर नादिर



इश्क़ तो अपने लहू में ही सँवरता है सो हम
किस लिए रुख़ पे कोई ग़ाज़ा लगा कर देखें
- अता तुराब



इक खिलौना टूट जाएगा नया मिल जाएगा
मैं नहीं तो कोई तुझ को दूसरा मिल जाएगा
- अदीम हाशमी



उन से हम लौ लगाए बैठे हैं
आग दिल में दबाए बैठे हैं
- अनवर देहलवी



हमारे इश्क़ और उन के तग़ाफ़ुल का ये आलम है
कि हम दिल हार बैठे हैं वो लेने हार लेटे हैं
- अनवर बरेलवी



जो हो सका न मिरा उस को भूल जाऊँ मैं
पराई आग में क्यूँ उँगलियाँ जलाऊँ मैं
- अनवर महमूद खालिद



न मिला पर न मिला इश्क़ को अंदाज़-ए-जुनूँ
हम ने मजनूँ की भी आशुफ़्ता-सरी देखी है
- अनवर मोअज़्ज़म



इश्क़ तो हर शख़्स करता है 'शुऊर'
तुम ने अपना हाल ये क्या कर लिया
- अनवर शऊर



इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़
ये मोहब्बत है कोई शादी नहीं
- अनवर शऊर



ज़माने के झमेलों से मुझे क्या
मिरी जाँ! मैं तुम्हारा आदमी हूँ
- अनवर शऊर



सिर्फ़ उस के होंट काग़ज़ पर बना देता हूँ मैं
ख़ुद बना लेती है होंटों पर हँसी अपनी जगह
- अनवर शऊर



इश्क़ की आग ऐ मआज़-अल्लाह
न कभी दब सकी दबाने से
- अनवर साबरी



फिर अहल-ए-इश्क़ की तख़्लीक़ होती है पहले
जुनूँ की आग में बरसों ख़मीर रहता है
- अनीस अब्र



दयार-ए-इश्क़ में तन्हा रहा नहीं हरगिज़
ख़ुशी ने हाथ जो छोड़ा तो ग़म ने थाम लिया
- अनीसा हारून शिरवानिया



वो जिस ने देखा नहीं इश्क़ का कभी मकतब
मैं उस के हाथ में दिल की किताब क्या देता
- अफ़ज़ल इलाहाबादी



मैं एक इश्क़ में नाकाम क्या हुआ 'गौहर'
हर एक काम में मुझ को ख़सारा होने लगा
- अफ़ज़ल गौहर राव



हिज्र में इतना ख़सारा तो नहीं हो सकता
एक ही इश्क़ दोबारा तो नहीं हो सकता
- अफ़ज़ल गौहर राव



तुम्हारे हिज्र में क्यूँ ज़िंदगी न मुश्किल हो
तुम्हीं जिगर हो तुम्हीं जान हो तुम्हीं दिल हो
- अफ़सर इलाहाबादी



मुझे गुम-शुदा दिल का ग़म है तो ये है
कि इस में भरी थी मोहब्बत किसी की
- अफ़सर इलाहाबादी



इस क़दर डूबे गुनाह-ए-इश्क़ में तेरे हबीब
सोचते हैं जाएँगे किस मुँह से तौबा की तरफ़
- अफ़ीफ़ सिराज



तब्सिरा फूल नहीं करता कभी खुशबू का
इश्क एलान नहीं करता अगर होता है
- आतिश इंदोरी



ये दाग़-ए-इश्क़ जो मिटता भी है चमकता भी है
ये ज़ख़्म है कि निशाँ है मुझे नहीं मालूम
- अबरार अहमद



ब-पास-ए-एहतिराम-ए-इश्क़ हम ख़ामोश हैं वर्ना
परेशाँ कर भी सकते हैं परेशाँ हो भी सकते हैं
- अबरार शाहजहाँपुरी



कारवाँ इश्क़ की मंज़िल के क़रीं आ पहूँचा
ख़ुद मिरे दिल में मिरे दिल का मकीं आ पहूँचा
- अबु मोहम्मद वासिल बहराईची



इश्क़ के मज़मूँ थे जिन में वो रिसाले क्या हुए
ऐ किताब-ए-ज़िंदगी तेरे हवाले क्या हुए
- अबु मोहम्मद सहर



इश्क़ को हुस्न के अतवार से क्या निस्बत है
वो हमें भूल गए हम तो उन्हें याद करें
- अबु मोहम्मद सहर



फिर खुले इब्तिदा-ए-इश्क़ के बाब
उस ने फिर मुस्कुरा के देख लिया
- अबु मोहम्मद सहर



रह-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा भी कूचा-ओ-बाज़ार हो जैसे
कभी जो हो नहीं पाता वो सौदा याद आता है
- अबु मोहम्मद सहर



'सहर' अब होगा मेरा ज़िक्र भी रौशन-दिमाग़ों में
मोहब्बत नाम की इक रस्म-ए-बेजा छोड़ दी मैं ने
- अबु मोहम्मद सहर



बे-नियाज़-ए-दहर कर देता है इश्क़
बे-ज़रों को लाल-ओ-ज़र देता है इश्क़
- अबुल हसनात हक़्क़ी



ज़ाहिरन मौत है क़ज़ा है इश्क़
पर हक़ीक़त में जाँ-फ़ज़ाँ है इश्क़
- अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़



इश्क़ है बे-गुदाज़ क्यूँ हुस्न है बे-नियाज़ क्यूँ
मेरी वफ़ा कहाँ गई उन की जफ़ा को क्या हुआ
- अब्दुल मजीद सालिक



तुझे कुछ इश्क़ ओ उल्फ़त के सिवा भी याद है ऐ दिल
सुनाए जा रहा है एक ही अफ़्साना बरसों से
- अब्दुल मजीद सालिक



इश्क़ में ऐन हुनर-मंदी है
सब जिसे बे-हुनरी कहते हैं
- अब्दुल मजीद हैरत



मय-कदे में इश्क़ के कुछ सरसरी जाना नहीं
कासा-ए-सर को यहाँ गर्दिश है पैमाने की तरह
- अब्दुल रहमान एहसान देहलवी



इश्क़ का तिफ़्ल गिर ज़मीं ऊपर
खेल सीखा है ख़ाक-बाज़ी का
- अब्दुल वहाब यकरू



इश्क़ के फ़न नीं हूँ मैं अवधूत
तिरे दर पे बिठा हूँ मल के भभूत
- अब्दुल वहाब यकरू



पहले बड़ी रग़बत थी तिरे नाम से मुझ को
अब सुन के तिरा नाम मैं कुछ सोच रहा हूँ
- अब्दुल हमीद अदम



लोग कहते हैं कि तुम से ही मोहब्बत है मुझे
तुम जो कहते हो कि वहशत है तो वहशत होगी
- अब्दुल हमीद अदम



हुस्न इक दिलरुबा हुकूमत है
इश्क़ इक क़ुदरती ग़ुलामी है
- अब्दुल हमीद अदम



किसी से इश्क़ करना और इस को बा-ख़बर करना
है अपने मतलब-ए-दुश्वार को दुश्वार-तर करना
- अब्बास अली ख़ान बेखुद



इक मोहब्बत ही पे मौक़ूफ़ नहीं है 'ताबिश'
कुछ बड़े फ़ैसले हो जाते हैं नादानी में
- अब्बास ताबिश



इश्क़ कर के भी खुल नहीं पाया
तेरा मेरा मुआमला क्या है
- अब्बास ताबिश



मुझ से तो दिल भी मोहब्बत में नहीं ख़र्च हुआ
तुम तो कहते थे कि इस काम में घर लगता है
- अब्बास ताबिश



मोहब्बत एक दम दुख का मुदावा कर नहीं देती
ये तितली बैठती है ज़ख़्म पर आहिस्ता आहिस्ता
- अब्बास ताबिश



ये तो अब इश्क़ में जी लगने लगा है कुछ कुछ
इस तरफ़ पहले-पहल घेर के लाया गया मैं
- अब्बास ताबिश



ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिन
लोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं
- अब्बास ताबिश



हिज्र को हौसला और वस्ल को फ़ुर्सत दरकार
इक मोहब्बत के लिए एक जवानी कम है
- अब्बास ताबिश



जब दिल ही नहीं है पहलू में फिर इश्क़ का सौदा कौन करे
अब उन से मोहब्बत कौन करे अब उन की तमन्ना कौन करे
- अमजद नजमी



तुझ से मिरा मुआमला होता ब-राह-ए-रास्त
ये इश्क़ दरमियान न होता तो ठीक था
- अमजद शहज़ाद



चुटकियाँ दिल में मिरे लेने लगा नाख़ुन-ए-इश्क़
गुल-बदन देख के उस गुल का बदन याद आया
- अमानत लखनवी



इश्क़ के हिज्जे भी जो न जानें वो हैं इश्क़ के दावेदार
जैसे ग़ज़लें रट कर गाते हैं बच्चे स्कूल में
- अमीक़ हनफ़ी



इस बार राह-ए-इश्क़ कुछ इतनी तवील थी
उस के बदन से हो के गुज़रना पड़ा मुझे
- अमीर इमाम



अभी आए अभी जाते हो जल्दी क्या है दम ले लो
न छेड़ूँगा मैं जैसी चाहे तुम मुझ से क़सम ले लो
- अमीर मीनाई



आहों से सोज़-ए-इश्क़ मिटाया न जाएगा
फूँकों से ये चराग़ बुझाया न जाएगा
- अमीर मीनाई



काबा भी हम गए न गया पर बुतों का इश्क़
इस दर्द की ख़ुदा के भी घर में दवा नहीं
- अमीर मीनाई



तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा
मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
- अमीर मीनाई



माँग लूँ तुझ से तुझी को कि सभी कुछ मिल जाए
सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है
- अमीर मीनाई



इश्क में जां से गुजरते है गुजरने वाले
मौत की राह नहीं देखते मरने वाले
- अमीर मीनाई



हम बने थे तबाह होने को
आप का इश्क़ तो बहाना था
- अमीर रज़ा मज़हरी



एक दरवेश को तिरी ख़ातिर
सारी बस्ती से इश्क़ हो गया है
- अम्मार इक़बाल



इश्क़ मरहून-ए-हिकायात-ओ-गुमाँ भी होगा
वाक़िआ है तो किसी तौर बयाँ भी होगा
- अरशद अब्दुल हमीद



सुख़न के चाक में पिन्हाँ तुम्हारी चाहत है
वगरना कूज़ा-गरी की किसे ज़रूरत है
- अरशद अब्दुल हमीद



मुझ से उन आँखों को वहशत है मगर मुझ को है इश्क़
खेला करता हूँ शिकार आहु-ए-सहराई का
- अरशद अली ख़ान क़लक़



इश्क़-ए-बुताँ का ले के सहारा कभी कभी
अपने ख़ुदा को हम ने पुकारा कभी कभी
- अर्श मलसियानी



मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है
ख़मोशी भी है ये आवाज़ भी है
- अर्श मलसियानी



अदा-ए-इश्क़ हूँ पूरी अना के साथ हूँ मैं
ख़ुद अपने साथ हूँ यानी ख़ुदा के साथ हूँ मैं
- अली ज़रयून



नफ़रत से मोहब्बत को सहारे भी मिले हैं
तूफ़ान के दामन में किनारे भी मिले हैं
- अली ज़हीर रिज़वी लखनवी



अजब कुछ इश्क़ की ख़ुश-तर है वादी
कि जिस वादी में है हर वक़्त शादी
- अलीमुल्लाह



इश्क़ के कूचे में जब जाता है दिल करने को सैर
वाँ नहीं मालूम होता रोज़ है या रात है
- अलीमुल्लाह



टपके जो अश्क वलवले शादाब हो गए
कितने अजीब इश्क़ के आदाब हो गए
- अल्ताफ़ मशहदी



आगे बढ़े न क़िस्सा-ए-इश्क़-ए-बुताँ से हम
सब कुछ कहा मगर न खुले राज़-दाँ से हम
- अल्ताफ़ हुसैन हाली



इश्क़ सुनते थे जिसे हम वो यही है शायद
ख़ुद-बख़ुद दिल में है इक शख़्स समाया जाता
- अल्ताफ़ हुसैन हाली



तुम को हज़ार शर्म सही मुझ को लाख ज़ब्त
उल्फ़त वो राज़ है कि छुपाया न जाएगा
- अल्ताफ़ हुसैन हाली



हम ने अव्वल से पढ़ी है ये किताब आख़िर तक
हम से पूछे कोई होती है मोहब्बत कैसी
- अल्ताफ़ हुसैन हाली



होती नहीं क़ुबूल दुआ तर्क-ए-इश्क़ की
दिल चाहता न हो तो ज़बाँ में असर कहाँ
- अल्ताफ़ हुसैन हाली



अक़्ल को तन्क़ीद से फ़ुर्सत नहीं
इश्क़ पर आमाल की बुनियाद रख
- अल्लामा इक़बाल



इश्क़ तिरी इंतिहा इश्क़ मिरी इंतिहा
तू भी अभी ना-तमाम मैं भी अभी ना-तमाम
- अल्लामा इक़बाल



इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में
या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर
- अल्लामा इक़बाल



जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही
खुलते हैं ग़ुलामों पर असरार-ए-शहंशाही
- अल्लामा इक़बाल



तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
- अल्लामा इक़बाल



सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
- अल्लामा इक़बाल



हुई न आम जहाँ में कभी हुकूमत-ए-इश्क़
सबब ये है कि मोहब्बत ज़माना-साज़ नहीं
- अल्लामा इक़बाल



इश्क़ की तमन्ना थी इश्क़ की तमन्ना है
इश्क़ ही की राहों में मस्तियों का मेला है
- अवैसुल हसन खान



बहुत बदनाम कर दिया है इस जमाने ने,
अब मोहब्बत का नाम ही बदलना पडेगा।।
- अवनींद्र बिस्मिल



दे आया अपनी जान भी दरबार-ए-इश्क़ में
फिर भी न बन सका ख़बर अख़बार-ए-इश्क़ में
- अशरफ़ शाद



देखने के लिए सारा आलम भी कम
चाहने के लिए एक चेहरा बहुत
- असअ'द बदायुनी



'असग़र' हरीम-ए-इश्क़ में हस्ती ही जुर्म है
रखना कभी न पाँव यहाँ सर लिए हुए
- असग़र गोंडवी



इश्क़ की बेताबियों पर हुस्न को रहम आ गया
जब निगाह-ए-शौक़ तड़पी पर्दा-ए-महमिल न था
- असग़र गोंडवी



कुछ मिलते हैं अब पुख़्तगी-ए-इश्क़ के आसार
नालों में रसाई है न आहों में असर है
- असग़र गोंडवी



नियाज़-ए-इश्क़ को समझा है क्या ऐ वाइज़-ए-नादाँ
हज़ारों बन गए काबे जबीं मैं ने जहाँ रख दी
- असग़र गोंडवी



जाने किस किस का गला कटता पस-ए-पर्दा-ए-इश्क़
खुल गए मेरी शहादत में सितमगर कितने
- असग़र मेहदी होश



इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया
- असद भोपाली



इश्क़ में शिकवा कुफ़्र है और हर इल्तिजा हराम
तोड़ दे कासा-ए-मुराद इश्क़ गदागरी नहीं
- असर रामपुरी



इश्क़ से लोग मना करते हैं
जैसे कुछ इख़्तियार है अपना
- असर लखनवी



इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है
हुस्न ख़ुद बे-ताब है जल्वा दिखाने के लिए
- असरार-उल-हक़ मजाज़



कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं
ये किस के हाथ से दामन छुड़ा रहा हूँ मैं
- असरार-उल-हक़ मजाज़



ये मेरे इश्क़ की मजबूरियाँ मआज़-अल्लाह
तुम्हारा राज़ तुम्हीं से छुपा रहा हूँ मैं
- असरार-उल-हक़ मजाज़



हुस्न को शर्मसार करना ही
इश्क़ का इंतिक़ाम होता है
- असरार-उल-हक़ मजाज़



मैं तो मिट्टी हो रहा था इश्क़ में लेकिन 'अता'
आ गई मुझ में कहीं से बे-दिमाग़ी 'मीर' की
- अहमद अता



तुझ से बिछड़ूँ तो तिरी ज़ात का हिस्सा हो जाऊँ
जिस से मरता हूँ उसी ज़हर से अच्छा हो जाऊँ
- अहमद कमाल परवाज़ी



तू ने ऐ इश्क़ ये सोचा कि तिरा क्या होगा
तेरे सर से मैं अगर हाथ उठा लेता हूँ
- अहमद कामरान



ये भी एजाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी
उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था
- अहमद ख़याल



कुछ खेल नहीं है इश्क़ करना
ये ज़िंदगी भर का रत-जगा है
- अहमद नदीम क़ासमी



भरी दुनिया में फ़क़त मुझ से निगाहें न चुरा
इश्क़ पर बस न चलेगा तिरी दानाई का
- अहमद नदीम क़ासमी



अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़हम को तुझ से हैं उमीदें
ये आख़िरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ
- अहमद फ़राज़



आशिक़ी में 'मीर' जैसे ख़्वाब मत देखा करो
बावले हो जाओगे महताब मत देखा करो
- अहमद फ़राज़



उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ
- अहमद फ़राज़



किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
- अहमद फ़राज़



तुझ से मिल कर तो ये लगता है कि ऐ अजनबी दोस्त
तू मिरी पहली मोहब्बत थी मिरी आख़िरी दोस्त
- अहमद फ़राज़



दो घड़ी उस से रहो दूर तो यूँ लगता है
जिस तरह साया-ए-दीवार से दीवार जुदा
- अहमद फ़राज़



'फ़राज़' इश्क़ की दुनिया तो ख़ूब-सूरत थी
ये किस ने फ़ित्ना-ए-हिज्र-ओ-विसाल रक्खा है
- अहमद फ़राज़



ये किन नज़रों से तू ने आज देखा
कि तेरा देखना देखा न जाए
- अहमद फ़राज़



रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
- अहमद फ़राज़



सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते
वर्ना इतने तो मरासिम थे कि आते जाते
- अहमद फ़राज़



हम तिरे शौक़ में यूँ ख़ुद को गँवा बैठे हैं
जैसे बच्चे किसी त्यौहार में गुम हो जाएँ
- अहमद फ़राज़



हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा'द ये मा'लूम
कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी
- अहमद फ़राज़



अहल-ए-हवस तो ख़ैर हवस में हुए ज़लील
वो भी हुए ख़राब, मोहब्बत जिन्हों ने की
- अहमद मुश्ताक़



इश्क़ में कौन बता सकता है
किस ने किस से सच बोला है
- अहमद मुश्ताक़



इस मअ'रके में इश्क़ बेचारा करेगा क्या
ख़ुद हुस्न को हैं जान के लाले पड़े हुए
- अहमद मुश्ताक़



जहान-ए-इश्क़ से हम सरसरी नहीं गुज़रे
ये वो जहाँ है जहाँ सरसरी नहीं कोई शय
- अहमद मुश्ताक़



तू ने ही तो चाहा था कि मिलता रहूँ तुझ से
तेरी यही मर्ज़ी है तो अच्छा नहीं मिलता
- अहमद मुश्ताक़



मुझे मालूम है अहल-ए-वफ़ा पर क्या गुज़रती है
समझ कर सोच कर तुझ से मोहब्बत कर रहा हूँ मैं
- अहमद मुश्ताक़



मोहब्बत मर गई 'मुश्ताक़' लेकिन तुम न मानोगे
मैं ये अफ़्वाह भी तुम को सुना कर देख लेता हूँ
- अहमद मुश्ताक़



रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए
इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है
- अहमद मुश्ताक़



रोने लगता हूँ मोहब्बत में तो कहता है कोई
क्या तिरे अश्कों से ये जंगल हरा हो जाएगा
- अहमद मुश्ताक़



कहीं ये अपनी मोहब्बत की इंतिहा तो नहीं
बहुत दिनों से तिरी याद भी नहीं आई
- अहमद राही



इश्क़ इक मशग़ला-ए-जाँ भी तो हो सकता है
क्या ज़रूरी है कि आज़ार किया जाए उसे
- अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी



इस इश्क़ में न पूछो हाल-ए-दिल-ए-दरीदा
तुम ने सुना तो होगा वो शे'र 'मुसहफ़ी' का
- अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी



मेरा सलाम इश्क़ अलैहिस-सलाम को
ख़ुसरव उधर ख़राब इधर कोहकन ख़राब
- अहमद हुसैन माइल



मोहब्बत ने 'माइल' किया हर किसी को
किसी पर किसी को किसी पर किसी को
- अहमद हुसैन माइल



है हुक्म-ए-आम इश्क़ अलैहिस-सलाम का
पूजो बुतों को भेद कुछ इन में ख़ुदा के हैं
- अहमद हुसैन माइल



इश्क़ रुस्वा-कुन-ए-आलम वो है 'अहसन' जिस से
नेक-नामों की भी बद-नामी ओ रुस्वाई है
- अहसन मारहरवी



तंग आ गया हूँ वुस्अत-ए-मफ़हूम-ए-इश्क़ से
निकला जो हर्फ़ मुँह से वो अफ़्साना हो गया
- अहसन मारहरवी



जी चाहता है उस बुत-ए-काफ़िर के इश्क़ में
तस्बीह तोड़ डालिए ज़ुन्नार देख कर
- आग़ा अकबराबादी



हमें तो उन की मोहब्बत है कोई कुछ समझे
हमारे साथ मोहब्बत उन्हें नहीं तो नहीं
- आग़ा अकबराबादी



इश्क़ हो जाएगा मेरी दास्तान-ए-इश्क़ से
रात भर जागा करोगे इस कहानी के लिए
- आग़ा हज्जू शरफ़



अब अगर इश्क़ के आसार नहीं बदलेंगे
हम भी पैराया-ए-इज़हार नहीं बदलेंगे
- आग़ाज़ बरनी



सब्र की तकरार थी जोश ओ जुनून-ए-इश्क़ से
ज़िंदगी भर दिल मुझे मैं दिल को समझाता रहा
- आज़िम कोहली



इश्क़ जैसे कहीं छूने से भी लग जाता हो
कौन बैठेगा भला आप के बीमार के साथ
- आतिफ़ वहीद यासिर



न पूछो हुस्न की तारीफ़ हम से
मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है
- आदिल फ़ारूक़ी



इश्क़ करता है तो फिर इश्क़ की तौहीन न कर
या तो बेहोश न हो, हो तो न फिर होश में आ
- आनंद नारायण मुल्ला



इश्क़ में वो भी एक वक़्त है जब
बे-गुनाही गुनाह है प्यारे
- आनंद नारायण मुल्ला



मुख़्तसर अपनी हदीस-ए-ज़ीस्त ये है इश्क़ में
पहले थोड़ा सा हँसे फिर उम्र भर रोया किए
- आनंद नारायण मुल्ला



इश्क़ में ये मजबूरी तो हो जाती है
दुनिया ग़ैर-ज़रूरी तो हो जाती है
- आफ़ताब इक़बाल शमीम



इश्क़ का तीर दिल में लागा है
दर्द जो होवता था भागा है
- आबरू शाह मुबारक



इश्क़ की सफ़ मनीं नमाज़ी सब
'आबरू' को इमाम करते हैं
- आबरू शाह मुबारक



फ़ानी-ए-इश्क़ कूँ तहक़ीक़ कि हस्ती है कुफ़्र
दम-ब-दम ज़ीस्त नें मेरी मुझे ज़ुन्नार दिया
- आबरू शाह मुबारक



मियाँ ये इश्क़ तो सब टूट कर ही करते हैं
किसी से हिज्र अगर वालिहाना हो जाए
- आबिद मलिक



आबलों का शिकवा क्या ठोकरों का ग़म कैसा
आदमी मोहब्बत में सब को भूल जाता है
- आमिर उस्मानी



इश्क़ के मराहिल में वो भी वक़्त आता है
आफ़तें बरसती हैं दिल सुकून पाता है
- आमिर उस्मानी



इश्क़ सर-ता-ब-क़दम आतिश-ए-सोज़ाँ है मगर
उस में शोला न शरारा न धुआँ होता है
- आमिर उस्मानी



इश्क़ से बाज़ आते हम दीवाने क्या
थी समझ की बात हम समझे नहीं
- आमिर मौसवी



जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते
मोहब्बत दीन होती है वफ़ा ईमान होती है
- आरज़ू लखनवी



मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे ग़ैर-मुमकिन है
बढ़ी जब बे-ख़ुदी फिर कौन डरता है गुनाहों से
- आरज़ू लखनवी



मोहब्बत वहीं तक है सच्ची मोहब्बत
जहाँ तक कोई अहद-ओ-पैमाँ नहीं है
- आरज़ू लखनवी



ये ज़ोरा-ज़ोरी इश्क़ की थी फ़ितरत ही जिस ने बदल डाली
जलता हुआ दिल हो कर पानी आँसू बन जाना क्या जाने
- आरज़ू लखनवी



वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे
जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है
- आरज़ू लखनवी



हुस्न ओ इश्क़ की लाग में अक्सर छेड़ उधर से होती है
शम्अ की शोअ'ला जब लहराई उड़ के चला परवाना भी
- आरज़ू लखनवी



इश्क़ में तहज़ीब के हैं और ही कुछ फ़लसफ़े
तुझ से हो कर हम ख़फ़ा ख़ुद से ख़फ़ा रहने लगे
- आलम ख़ुर्शीद



मा-सिवा-ए-कार-ए-आह-ओ-अश्क क्या है इश्क़ में
है सवाद-ए-आब-ओ-आतिश दीदा ओ दिल के क़रीब
- आलमताब तिश्ना



हम अपने इश्क़ की अब और क्या शहादत दें
हमें हमारे रक़ीबों ने मो'तबर जाना
- आलमताब तिश्ना



बंदिशें इश्क़ में दुनिया से निराली देखें
दिल तड़प जाए मगर लब न हिलाए कोई
- आले रज़ा रज़ा



मुझे ख़बर ही नहीं थी कि इश्क़ का आग़ाज़
अब इब्तिदा से नहीं दरमियाँ से होता है
- आसिम वास्ती



इश्क़ पाबंद-ए-वफ़ा है न कि पाबंद-ए-रुसूम
सर झुकाने को नहीं कहते हैं सज्दा करना
- आसी उल्दनी



अपने से पहले दश्त में रहते कोह से नहरे लाते थे,
हमने भी इश्क किया है लोगो सब अफसाने होते है |
- - इब्ने इंशा



जज़्बा-ए-इश्क़ सलामत है तो इंशा-अल्लाह
कच्चे धागे से चले आएँगे सरकार बंधे
- इंशा अल्लाह ख़ान इंशा



ज़मीं से उट्ठी है या चर्ख़ पर से उतरी है
ये आग इश्क़ की या-रब किधर से उतरी है
- इंशा अल्लाह ख़ान इंशा



आदमी जान के खाता है मोहब्बत में फ़रेब
ख़ुद-फ़रेबी ही मोहब्बत का सिला हो जैसे
- इक़बाल अज़ीम



बारहा उन से न मिलने की क़सम खाता हूँ मैं
और फिर ये बात क़स्दन भूल भी जाता हूँ मैं
- इक़बाल अज़ीम



हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते
अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते
- इक़बाल अज़ीम



ज़ियान-ए-दिल ही इस बाज़ार में सूद-ए-मोहब्बत है
यहाँ है फ़ाएदा ख़ुद को अगर नुक़सान में रख लें
- इक़बाल कौसर



सुबू-ए-फ़लसफ़ा-ए-इश्क़-ओ-कहकशान-ए-हयात
शुआ-ए-क़हर-ए-तबस्सुम, चराग़-ए-दीदा-ए-नम
- इज़हार मलीहाबादी



ये मोहब्बत भी एक नेकी है इस को दरिया में डाल आते हैं

ये मोहब्बत भी एक नेकी है
इस को दरिया में डाल आते हैं
- इनाम नदीम



अगरचे इश्क़ में आफ़त है और बला भी है
निरा बुरा नहीं ये शग़्ल कुछ भला भी है
- इनामुल्लाह ख़ाँ यक़ीन



हुस्न यूँ इश्क़ से नाराज़ है अब
फूल ख़ुश्बू से ख़फ़ा हो जैसे
- इफ़्तिख़ार आज़मी



तुम से बिछड़ कर ज़िंदा हैं
जान बहुत शर्मिंदा हैं
- इफ़्तिख़ार आरिफ़



बहुत मुश्किल ज़मानों में भी हम अहल-ए-मोहब्बत
वफ़ा पर इश्क़ की बुनियाद रखना चाहते हैं
- इफ़्तिख़ार आरिफ़



मआल-ए-इज़्ज़त-ए-सादात-ए-इश्क़ देख के हम
बदल गए तो बदलने पे इतनी हैरत क्या
- इफ़्तिख़ार आरिफ़



इस क़दर भी तो न जज़्बात पे क़ाबू रक्खो
थक गए हो तो मिरे काँधे पे बाज़ू रक्खो
- इफ़्तिख़ार नसीम



किसी सबब से अगर बोलता नहीं हूँ मैं
तो यूँ नहीं कि तुझे सोचता नहीं हूँ मैं
- इफ़्तिख़ार मुग़ल



ख़ुद-कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है
इस लिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता है
- इबरत सिद्दीक़ी



अपने हमराह जो आते हो इधर से पहले
दश्त पड़ता है मियाँ इश्क़ में घर से पहले
- इब्न-ए-इंशा



बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र ओ सुकूँ
तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
- इब्न-ए-इंशा



हम भूल सके हैं न तुझे भूल सकेंगे
तू याद रहेगा हमें हाँ याद रहेगा
- इब्न-ए-इंशा



हुस्न बना जब बहती गंगा
इश्क़ हुआ काग़ज़ की नाव
- इब्न-ए-सफ़ी



काफ़िर-ए-इश्क़ हूँ मैं सब से मोहब्बत है मुझे
एक बुत क्या कि समाया है कलीसा दिल में
- इमदाद अली बहर



रत्ब-ओ-याबिस में है तसर्रुफ़-ए-इश्क़
आँख दरिया है दिल जज़ीरा है
- इमदाद अली बहर



सौ फ़साद एक इश्क़ में उट्ठे
बोया इक तुख़्म उगे हज़ार दरख़्त
- इमदाद अली बहर



पहली सिगरेट पहला ख़्वाब और पहला इश्क़
इन तीनों में एक भी मुझ को याद नहीं
- इमरान शमशाद



ऐन दानाई है 'नासिख़' इश्क़ में दीवानगी
आप सौदाई हैं जो कहते हैं सौदाई मुझे
- इमाम बख़्श नासिख़



इश्क़ क्या कार-ए-हवस भी कोई आसान नहीं
ख़ैर से पहले इसी काम के क़ाबिल हो जाओ
- इरफ़ान सिद्दीक़ी



कहा था तुम ने कि लाता है कौन इश्क़ की ताब
सो हम जवाब तुम्हारे सवाल ही के तो हैं
- इरफ़ान सिद्दीक़ी



कुछ इश्क़ के निसाब में कमज़ोर हम भी हैं
कुछ पर्चा-ए-सवाल भी आसान चाहिए
- इरफ़ान सिद्दीक़ी



बदन में जैसे लहू ताज़ियाना हो गया है
उसे गले से लगाए ज़माना हो गया है
- इरफ़ान सिद्दीक़ी



वगर्ना तंग न थी इश्क़ पर ख़ुदा की ज़मीं
कहा था उस ने तो मैं अपने घर चला भी गया
- इरफ़ान सिद्दीक़ी



शोला-ए-इश्क़ बुझाना भी नहीं चाहता है
वो मगर ख़ुद को जलाना भी नहीं चाहता है
- इरफ़ान सिद्दीक़ी



रिश्ता बहाल काश फिर उस की गली से हो
जी चाहता है इश्क़ दोबारा उसी से हो
- इरशाद ख़ान सिकंदर



'इश्क़' रौशन था वहाँ दीदा-ए-आहू से चराग़
मैं जो यक रात गया क़ैस के काशाने में
- इश्क़ औरंगाबादी



आग़ाज़-ए-इश्क़ उम्र का अंजाम हो गया
नाकामियों के ग़म में मिरा काम हो गया
- इस्माइल मेरठी



इश्क़ फिर इश्क़ है आशुफ़्ता-सरी माँगे है
होश के दौर में भी जामा-दरी माँगे है
- उनवान चिश्ती



अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए
अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
- उबैदुल्लाह अलीम



ज़मीं के लोग तो क्या दो दिलों की चाहत में
ख़ुदा भी हो तो उसे दरमियान लाओ मत
- उबैदुल्लाह अलीम



मुसाफ़िरों से मोहब्बत की बात कर लेकिन
मुसाफ़िरों की मोहब्बत का ए'तिबार न कर
- उमर अंसारी



किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है
पर आँसुओं को हुरूफ़‌‌‌‌-ए-मुक़त्तिआ'त समझ
- उमैर नजमी



क़ब्रों में नहीं हम को किताबों में उतारो
हम लोग मोहब्बत की कहानी में मरें हैं
- एजाज तवक्कल



शोरिश-ए-इश्क़ में है हुस्न बराबर का शरीक
सोच कर जुर्म-ए-तमन्ना की सज़ा दो हम को
- एहसान दानिश



जिस को हम ने चाहा था वो कहीं नहीं इस मंज़र में
जिस ने हम को प्यार किया वो सामने वाली मूरत है
- ऐतबार साजिद



इश्क़ ओ मोहब्बत क्या होते हैं क्या समझाऊँ वाइज़ को
भैंस के आगे बीन बजाना मेरे बस की बात नहीं
- कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर



आख़री हिचकी तिरे ज़ानूँ पे आए
मौत भी मैं शाइराना चाहता हूँ
- क़तील शिफ़ाई



किस तरह अपनी मोहब्बत की मैं तकमील करूँ
ग़म-ए-हस्ती भी तो शामिल है ग़म-ए-यार के साथ
- क़तील शिफ़ाई



क्या जाने किस अदा से लिया तू ने मेरा नाम
दुनिया समझ रही है कि सच-मुच तिरा हूँ मैं
- क़तील शिफ़ाई



गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं
हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं
- क़तील शिफ़ाई



चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी
वगरना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते
- क़तील शिफ़ाई



जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ
जाने क्यूँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं
- क़तील शिफ़ाई



तर्क-ए-वफ़ा के ब'अद ये उस की अदा 'क़तील'
मुझ को सताए कोई तो उस को बुरा लगे
- क़तील शिफ़ाई



दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं
लोग अब मुझ को तिरे नाम से पहचानते हैं
- क़तील शिफ़ाई



न जाने कौन सी मंज़िल पे आ पहुँचा है प्यार अपना
न हम को ए'तिबार अपना न उन को ए'तिबार अपना
- क़तील शिफ़ाई



मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मअ'नी
ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को
- क़तील शिफ़ाई



मैं जब 'क़तील' अपना सब कुछ लुटा चुका हूँ
अब मेरा प्यार मुझ से दानाई चाहता है
- क़तील शिफ़ाई



ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में
ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे
- क़तील शिफ़ाई



रहेगा साथ तिरा प्यार ज़िंदगी बन कर
ये और बात मिरी ज़िंदगी वफ़ा न करे
- क़तील शिफ़ाई



सुबूत-ए-इश्क़ की ये भी तो एक सूरत है
कि जिस से प्यार करें उस पे तोहमतें भी धरें
- क़तील शिफ़ाई



हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे
अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
- क़तील शिफ़ाई



बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी
लोग बे-वज्ह उदासी का सबब पूछेंगे
- कफ़ील आज़र अमरोहवी



जिस क़दर जज़्ब-ए-मोहब्बत का असर होता गया
इश्क़ ख़ुद तर्क ओ तलब से बे-ख़बर होता गया
- क़मर मुरादाबादी



हर्फ़ आने न दिया इश्क़ की ख़ुद्दारी पर
काम नाकाम तमन्ना से लिया है मैं ने
- क़मर मुरादाबादी



है मेरी मोहब्बत का उन पर भी असर शायद,
बेवजह ख़ामोशी से, इक बात निकलती है |
- क़मर मुरादाबादी



है ज़ीस्त की राहो में इक मोड़ मोहब्बत भी,
होश आता है इंसा को जब राह बदलती है |
- क़मर मुरादाबादी



चाहा तुझे तो खुद से मोहब्बत सी हो गई
खोने के बाद मिल गई अपनी खबर मुझे
- क़मर जलालाबादी



इश्क़ की दुनिया में क्या क्या हम को सौग़ातें मिलीं
सूनी सुब्हें रोती शामें जागती रातें मिलीं
- करम हैदराबादी



हमेशा आग के दरिया में इश्क़ क्यूँ उतरे
कभी तो हुस्न को ग़र्क़-ए-अज़ाब होना था
- करामत अली करामत



जी चाहेगा जिस को उसे चाहा न करेंगे
हम इश्क़ ओ हवस को कभी यकजा न करेंगे
- करामत अली शहीदी



इश्क़ में मौत का नाम है ज़िंदगी
जिस को जीना हो मरना गवारा करे
- कलीम आजिज़



ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी
- कलीम आजिज़



दिल थाम के करवट पे लिए जाऊँ हूँ करवट
वो आग लगी है कि बुझाए न बने है
- कलीम आजिज़



भला आदमी था प नादान निकला
सुना है किसी से मोहब्बत करे है
- कलीम आजिज़



मरना तो बहुत सहल सी इक बात लगे है
जीना ही मोहब्बत में करामात लगे है
- कलीम आजिज़



वो सितम न ढाए तो क्या करे उसे क्या ख़बर कि वफ़ा है क्या?
तू उसी को प्यार करे है क्यूँ ये 'कलीम' तुझ को हुआ है क्या?
- कलीम आजिज़



हाँ कुछ भी तो देरीना मोहब्बत का भरम रख
दिल से न आ दुनिया को दिखाने के लिए आ
- कलीम आजिज़



ऐ इश्क़ मिरे दोश पे तू बोझ रख अपना
हर सर मुतहम्मिल नहीं इस बार-ए-गिराँ का
- क़ाएम चाँदपुरी



दिल से बस हाथ उठा तू अब ऐ इश्क़
देह-ए-वीरान पर ख़िराज नहीं
- क़ाएम चाँदपुरी



इश्क़ है ऐ दिल कठिन कुछ ख़ाना-ए-ख़ाला नहीं
रख दिलेराना क़दम ता तुझ को हो इमदाद-ए-दाद
- क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी



छुपता नहीं है दिल में कभी राज़ इश्क़ का
ये आग वो है जिस को नहीं ताब संग में
- किशन कुमार वक़ार



तुम्हारे इश्क़-ए-अबरू में हिलाल-ए-ईद की सूरत
हज़ारों उँगलियाँ उट्ठीं जिधर से हो के हम निकले
- किशन कुमार वक़ार



मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए
- कृष्ण बिहारी नूर



इश्क में क्या मजा रह गय
ज़ुल्फ़ में दिल घिरा रह गया
- कृष्णकुमार चमन



इधर आ रक़ीब मेरे मैं तुझे गले लगा लूँ
मिरा इश्क़ बे-मज़ा था तिरी दुश्मनी से पहले
- कैफ़ भोपाली



एक कमी थी ताज-महल में
मैं ने तिरी तस्वीर लगा दी
- कैफ़ भोपाली



तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है
तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है
- कैफ़ भोपाली



झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं
- कैफ़ी आज़मी



वो पल जिस में मोहब्बत जवां होती है |
उस एक पल का तुझे इंतजार है के नहीं ||
- कैफ़ी आज़मी



आतिश-ए-इश्क़ से बचिए कि यहाँ हम ने भी
मोम की तरह से पत्थर को पिघलते देखा
- क़ैसर ख़ालिद



ज़िंदगी भर के लिए रूठ के जाने वाले
मैं अभी तक तिरी तस्वीर लिए बैठा हूँ
- क़ैसर-उल जाफ़री



तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
- क़ैसर-उल जाफ़री



मोहब्बत इक एहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दिवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आखो में आंसू है
जो तू समझे तो मोती हैं जो न समझे तो पानी है
- कुमार विश्वास



मुझे तो इश्क़ है फूलों में सिर्फ़ ख़ुशबू से
बुला रही है किसी लाला की महक मुझ को
- ख़लील मामून



सुना रहा हूँ उन्हें झूट-मूट इक क़िस्सा
कि एक शख़्स मोहब्बत में कामयाब रहा
- ख़लील-उर-रहमान आज़मी



होती नहीं है यूँही अदा ये नमाज़-ए-इश्क़
याँ शर्त है कि अपने लहू से वज़ू करो
- ख़लील-उर-रहमान आज़मी



मोहब्बत ज़ुल्फ़ का आसेब जादू है निगाहों का
मोहब्बत फ़ित्ना-ए-महशर बला-ए-ना-गहानी है
- ख़ार देहलवी



मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती
हमारे दरमियाँ ये फ़ासले, कैसे निकल आए
- ख़ालिद मोईन



न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है
दिया जल रहा है हवा चल रही है
- ख़ुमार बाराबंकवी



भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम
क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए
- ख़ुमार बाराबंकवी



ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को
ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
- ख़ुमार बाराबंकवी



ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक
न लो इंतिक़ाम मुझ से मिरे साथ साथ चल के
- ख़ुमार बाराबंकवी



वहशतें इश्क़ और मजबूरी
क्या किसी ख़ास इम्तिहान में हूँ
- ख़ुर्शीद रब्बानी



वो तग़ाफ़ुल-शिआर क्या जाने
इश्क़ तो हुस्न की ज़रूरत है
- ख़ुर्शीद रब्बानी



तुम समझते हो बिछड़ जाने से मिट जाता है इश्क
तुम को इस दरिया कि गहराई का अंदाजा नहीं
- खुर्शीद रिज़वी



उनसे मिलकर भी कहा मिटता है दिल का इज्तिराब
इश्क की दिवार के दोनों तरफ साया नहीं
- खुर्शीद रिज़वी



नई मुश्किल कोई दरपेश हर मुश्किल से आगे है
सफ़र दीवानगी का इश्क़ की मंज़िल से आगे है
- ख़ुशबीर सिंह शाद



अज़िय्यत मुसीबत मलामत बलाएँ
तिरे इश्क़ में हम ने क्या क्या न देखा
- ख़्वाजा मीर दर्द



आप के बा'द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
- गुलज़ार



कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की
- गुलज़ार



जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है
- गुलज़ार



करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम
मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता
- ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर



इश्क़ ने सामने होते ही जलाया दिल को
जैसे बस्ती को लगावे है अदू जंग में आग
- ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी



इश्क़ में ख़ूब नीं बहुत रोना
इस से इफ़शा-ए-राज़ होता है
- ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी



इश्क़ में दर्द से है हुर्मत-ए-दिल
चश्म को आबरू है आँसू से
- ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी



इश्क़ की दस्तरस में कुछ भी नहीं
जान-ए-मन! मेरे बस में कुछ भी नहीं
- ग़ुलाम हुसैन साजिद



इश्क़ पर इख़्तियार है किस का
फ़ाएदा पेश-ओ-पस में कुछ भी नहीं
- ग़ुलाम हुसैन साजिद



इश्क़ पर फ़ाएज़ हूँ औरों की तरह लेकिन मुझे
वस्ल का लपका नहीं है हिज्र से वहशत नहीं
- ग़ुलाम हुसैन साजिद



नहीं बचता है बीमार-ए-मोहब्बत
सुना है हम ने 'गोया' की ज़बानी
- गोया फ़क़ीर मोहम्मद



इक इश्क़ का ग़म आफ़त और उस पे ये दिल आफ़त
या ग़म न दिया होता या दिल न दिया होता
- चराग़ हसन हसरत

इश्क और मोहब्बत पर शायरी का भाग 2

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जखीरा, साहित्य संग्रह: इश्क़ और मोहब्बत पर कुछ अशआर (शायरी ) भाग -1
इश्क़ और मोहब्बत पर कुछ अशआर (शायरी ) भाग -1
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