Showing posts from January, 2019

देश गान - हामिद अल्लाह अफ़सर मेरठी

देश गान भारत प्यारा, देश हमारा, सब देशो से न्यारा है, हर रूत, हर एक मौसम इस का, कैसा प्यारा-प्यारा है, कैसा सुहाना, कैसा सुन्दर, प्यारा देश हमारा है | दुःख में, सुख में हर हालत में, भारत दिल का सहारा है | भारत प्यारा, देश हमारा, सब देशो से न्या…

सआदत हसन मंटो जीवन परिचय

सआदत हसन मंटो जीवन परिचय सआदत हसन मंटो साहब का जन्म 11 मई 1912 को समराला (पंजाब) में हुआ था | आपने भारत पकिस्तान के विभाजन को अपनी आँखों से देखा सो इस दर्द को अपनी कहानियों में उतारा | आपकी लेखन की प्रमुख भाषा उर्दू रही है | आपने मुख्य रूप से कहान…

बंदर ने इक लिया मोबाइल - डॉ. जियाउर रहमान जाफरी

बंदर ने इक लिया मोबाइल बंदर ने इक लिया मोबाइल कर दिया उसमें नंबर डायल बोली उधर बंदरिया हेलो हाल -चाल है कैसा बोलो कहा बंदर ने सुन मेरी रानी आज है थोड़ी सी परेशानी ऑफिस में कुछ काम है ज़्यादा मुझको कब आराम है ज़्यादा देर रात मैं घर पहु…

अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन - अहमद फ़राज़

अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन ज़ख़्म फूलों की तरह महकेंगे पर देखेगा कौन देखना सब रक़्स-ए-बिस्मल में मगन हो जाएँगे जिस तरफ़ से तीर आयेगा उधर देखेगा कौन जख्म जितने भी थे सब मंसूब कातिल…

बस गया हो ज़हन में जैसे कोई डर आजकल - कृष्ण कुमार नाज़

बस गया हो ज़हन में जैसे कोई डर आजकल बस गया हो ज़हन में जैसे कोई डर आजकल सब इकट्ठा कर रहे हैं छत पे पत्थर आजकल शहरभर की नालियाँ गिरती हैं जिस तालाब में वो समझने लग गया खु़द को समंदर आजकल फ़ाइलों का ढेर, वेतन में इज़ाफ़ा कुछ नहीं हाँ, अगर बढ़…

दिल जो दीवाना नहीं आखिर को दीवाना भी था - जॉन एलिया

दिल जो दीवाना नहीं आखिर को दीवाना भी था दिल जो दीवाना नहीं आखिर को दीवाना भी था भूलने पर उस को जब आया तो पहचाना भी था जानिया किस शौक में रिश्ते बिछड़ कर रह गए काम तो कोई नहीं था पर हमें जाना भी था अजनबी-सा एक मौसम एक बेमौसम-सी शाम जब उसे आना…

डॉ राहत इंदौरी के 22 बेहतरीन शेर

डॉ राहत इंदौरी के 22 बेहतरीन शेर 1. ज़ुबाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लूटा हूँ मुझे हिसाब तो दे। 2. लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते क्यूँ है इतना डरते है तो घर से निकलते क्यूँ है। 3. शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम…

उसमें आवाज़ कुछ तुम्हारी लगे - डॉ जियाउर रहमान जाफरी

उसमें आवाज़ कुछ तुम्हारी लगे उसमें आवाज़ कुछ तुम्हारी लगे मुझको कोयल की कूक प्यारी लगे मैंने सीखा है जबसे सच कहना मेरी हर बात ही कटारी लगे खीर घर घर में क्यों बंटा आख़िर मुझको दुल्हन का पांव भारी लगे बस कि बदनाम हो गये हम - तुम मेरी खिड़की ते…

यकुम जनवरी है नया साल है - अमीर कज़लबाश

यकुम जनवरी है नया साल है यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है बचाए ख़ुदा शर की ज़द से उसे बेचारा बहुत नेक-आमाल है बताने लगा रात बूढ़ा फ़क़ीर ये दुनिया हमेशा से कंगाल है है दरिया में कच्चा घड़ा सोहनी किनारे पे गुम-सुम …

Load More
That is All
preload preload preload preload preload