Showing posts from November, 2017

बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब - राज़िक़ अंसारी

बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब अन्दर से है टूटे बाहर ख़ुश हैं सब देख लो अपनी प्यास छुपाने का अंजाम बोल रहा है एक समन्दर ख़ुश हैं सब ज़ख़्मों से दुख दर्द से लेना देना क्या तोड़ के शीशा मार के पत्थर ख़ुश है…

हिंदुस्तान छोड़ दो - इस्मत चुग़ताई

हिंदुस्तान छोड़ दो साहब मर गया जयंतराम ने बाजार से लाए हुए सौदे के साथ यह खबर लाकर दी। 'साहब- कौन साहब? 'वह कांटरिया साहब था न? 'वह काना साहब- जैक्सन। च-च-बेचारा। मैंने खिडकी में से झांक कर देखा। काई लगी पुरानी जगह- जगह से खो…

'आ'ली' जी अब आप चलो तुम अपने बोझ उठाए - जमीलुद्दीन आली

'आ'ली' जी अब आप चलो तुम अपने बोझ उठाए जमीलुद्दीन आली भारत में जन्मे ( 20 जनवरी 1925 ) और पाकिस्तान में मृत्यु को प्राप्त हुए | बीमारी के चलते 23 नवम्बर, 2015 में आपका देहावसान हुआ | 'आ'ली' जी अब आप चलो तुम अपने बोझ उठाए स…

मुझको ही ऐसा लगता है या सचमुच ही हो जाता है - मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

मुझको ही ऐसा लगता है या सचमुच ही हो जाता है मुझको ही ऐसा लगता है या सचमुच ही हो जाता है मै बातें तुमसे करता हूं चांद गुलाबी हो जाता है उस दिल के क्या कहने जिसमे गम के कांटे डूब गए हों ऐसा ही दिल और किसी के दिल से नत्थी हो जाता है कोयल को उकसा…

ख़ावर रिज़वी जीवन परिचय

ख़ावर रिज़वी जीवन परिचय ख़ावर रिज़वी साहब का जन्म 1 जून 1938 को हुआ | इनके जन्म के साल में कुछ गफलत है कुछ लोग इसे 1936 बताते है | आपका असल नाम सय्यद सिब्ते हसन रिज़वी था | आपको शायरी की कला अपनी माँ आबिदा बेगम से मिली जो की स्वयं एक बहुत अच्छी शायर…

मैं इसके नाज़ उठाता हूँ सो यह ऐसा नहीं करती - मुनव्वर राना

मैं इसके नाज़ उठाता हूँ सो यह ऐसा नहीं करती मैं इसके नाज़ उठाता हूँ सो यह ऐसा नहीं करती यह मिट्टी मेरे हाथों को कभी मैला नहीं करती खिलौनों की दुकानों की तरफ़ से आप क्यों गुज़रे ये बच्चे की तमन्ना है यह समझौता नहीं करती शहीदों की ज़मीं है जिस…

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं - अल्लामा इक़बाल

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं सितारों से आगे जहाँ और भी हैं अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं तही ज़िन्दगी से नहीं ये फ़ज़ायें यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं कना'अत न कर आलम-ए-रन्ग-ओ-बु पर चमन और भी, आशियाँ और भी हैं अगर खो गया एक नशेमन …

बहादुर शाह ज़फर जीवन परिचय

बहादुर शाह ज़फर जीवन परिचय भा रत के अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर उर्दू के जाने माने शायर थे | बहादुर शाह ज़फर का जन्म 24 अक्टूम्बर 1775 में हुआ था आपके पिता अकबर शाह द्वितीय और माँ लीलाबाई थी | आपके पिता की मृत्यु के बाद 18 सितंबर, 1837 में म…

शब को दलिया दला करे कोई - सय्यद ज़मीर जाफरी

शब को दलिया दला करे कोई शब को दलिया दला करे कोई सुब्ह को नाश्ता करे कोई इस का भी फ़ैसला करे कोई किस से कितना हया करे कोई आदमी से सुलूक दुनिया का जैसे अण्डा तला करे कोई चीज़ मिलती है सर्फ़ की हद तक अपना चमचा बड़ा करे कोई बात वो जो कहो स…

कभी कभी बेहद डर लगता है - सज्जाद ज़हीर

कभी कभी बेहद डर लगता है कभी कभी बेहद डर लगता है कि दोस्ती के सब रुपहले रिश्ते प्यार के सारे सुनहरे बंधन सूखी टहनियों की तरह चटख़ कर टूट न जाएँ आँखें खुलें, बंद हों देखें लेकिन बातें करना छोड़ दें हाथ काम करें उँगलियाँ दुनिया भर के क़ज़िए…

अब्दुल कावी देसनवी जीवनी

अब्दुल कावी देसनवी जीवनी अब्दुल कावी देसनवी वो उर्दू के लेखक थे जिनकी वजह से हमें आज जावेद अख्तर , मुज़फ़्फ़र हनफ़ी और इकबाल मसूद जैसे शायरो की शायरी पढने को मिली है जो कि देसनवी जी के शिष्य रहे है | अब्दुल कावी देसनवी का जन्म 1 नवम्बर 1930 क…

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