बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब - राज़िक़ अंसारी
बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब अन्दर से है टूटे बाहर ख़ुश हैं सब देख लो अपनी प्यास छुपाने का अंजाम बोल रहा है एक समन्दर ख़ुश हैं सब ज़ख़्मों से दुख दर्द से लेना देना क्या तोड़ के शीशा मार के पत्थर ख़ुश है…