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फिर बताओ कैसे सोच का विस्तार हो - अदम गोंडवी
फिर बताओ कैसे सोच का विस्तार हो - अदम गोंडवी

अदम गोंडवी के जन्मदिवस / जयंती पर उनकी एक ग़ज़ल पेश है : टी.वी. से अखबार तक गर सेक्स की बौछार हो फिर बताओ कैसे अपनी सोच का विस्तार हो ...

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 खूब पहचान लो 'असरार' हूँ मै ( मजाज़ लखनवी )
खूब पहचान लो 'असरार' हूँ मै ( मजाज़ लखनवी )

कल यानि १९ अक्टूम्बर को मजाज़ का जन्मदिवस था इस अवसर पर उन पर एक लेख है आशा है आप सभी को पसंद आएगा [ यह लेख मजाज़ पर लिखी गयी किताब मजाज़ और ...

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दीपावली पर कुछ अशआर
दीपावली पर कुछ अशआर

दीपो के पर्व दीपावली / दिवाली पर शायरो के कुछ अशआर : रो रहा था गोद में अम्माँ की इक तिफ़्ल-ए-हसीं इस तरह पलकों पे आँसू हो रहे थे बे-क...

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 इक दिया नाम का आज़ादी के - कैफी आज़मी
इक दिया नाम का आज़ादी के - कैफी आज़मी

दीपावली और दीपो के पर्व पर कैफी आज़मी साहब की यह नज़्म पेश है : एक दो भी नहीं छब्बीस दिए एक एक करके जलाये मैंने इक दिया नाम का आज़ादी के...

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मत पूछो कितना गमगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी - जाँन एलिया
मत पूछो कितना गमगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी - जाँन एलिया

मत पूछो कितना गमगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज्यादा मै तुमको याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अपने किनारों से कह दीजो आंसू तुमको रोते है ...

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तुम अपनी खुदनुमाई की शौहरत के चाव में-  रईस फिगार
तुम अपनी खुदनुमाई की शौहरत के चाव में- रईस फिगार

तुम अपनी खुदनुमाई की शौहरत के चाव में। डालो न अपने हाथ को जलते अलाव में।। लहजा भी भूल बैठा है वो गुफ्तुगू का अब। लगता है जी रहा है वो भ...

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