0
खुदगर्ज़ दुनिया में आखिर क्या करें - अनवर जलालपुरी
खुदगर्ज़ दुनिया में आखिर क्या करें - अनवर जलालपुरी

खुदगर्ज़ दुनिया में आखिर क्या करें क्या इन्हीं लोगों से समझौता करें शहर के कुछ बुत ख़फ़ा हैं इस लिये चाहते हैं हम उन्हें सजदा करें चन...

Read more »

0
थाम दामन उन्हें हम बिठाते रहे - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश
थाम दामन उन्हें हम बिठाते रहे - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश

थाम दामन उन्हें हम बिठाते रहे ज़ुल्फ़ झटकाए वो दूर जाते रहे जब तबीयत ज़रा तल्ख़ उनकी हुई हैं गुनाहगार हम ये बताते रहे बारहा तोड़ना प्यार क...

Read more »

0
किसने ऐसा किया इशारा था - डॉ. ज़िया उर रहमान जाफ़री
किसने ऐसा किया इशारा था - डॉ. ज़िया उर रहमान जाफ़री

किसने ऐसा किया इशारा था खत मेरा था पता तुम्हारा था तुम ये कहते हो भूल जाऊ मै तुमने चेहरा मेरा उतारा था काम आई फिर अपनी ताकत ही कोई क...

Read more »

0
पहला सा वो ज़मीं का न वो आसमां का रंग  - मुरलीधर शाद
पहला सा वो ज़मीं का न वो आसमां का रंग - मुरलीधर शाद

पहला सा वो ज़मीं का न वो आसमां का रंग दो दिन में ही बदल गया सारे जहा का रंग तेवर ही और हो गए अपने पराए के किस-किस का अब गिला हो की बदला ...

Read more »

0
वो जो मुह फेर कर गुजर जाए - मजरूह सुल्तानपुरी
वो जो मुह फेर कर गुजर जाए - मजरूह सुल्तानपुरी

वो जो मुह फेर कर गुजर जाए हश्र का भी नशा उतर जाए अब तो ले ले जिन्दगी यारब क्यों ये तोहमत भी अपने सर जाए आज उठी इस तरह निगाहें करम जै...

Read more »

2
जो बात है हद से बढ़ गयी है -फ़िराक गोरखपुरी
जो बात है हद से बढ़ गयी है -फ़िराक गोरखपुरी

जो बात है हद से बढ़ गयी है वाएज़ के भी कितनी चढ़ गई है हम तो ये कहेंगे तेरी शोख़ी दबने से कुछ और बढ़ गई है हर शय ब-नसीमे-लम्से-नाज़ुक...

Read more »

2
पहले सौ बार इधर और उधर देखा है - मजरूह सुल्तानपुरी
पहले सौ बार इधर और उधर देखा है - मजरूह सुल्तानपुरी

पहले सौ बार इधर और उधर देखा है तब कहीं डर के तुम्हें एक नज़र देखा है हम पे हँसती है जो दुनियाँ उसे देखा ही नहीं हम ने उस शोख को ऐ दीदा...

Read more »

1
दर्दे-दिल, दर्दे-वफ़ा, दर्दे-तमन्ना क्या है  - जाँ निसार अख़्तर
दर्दे-दिल, दर्दे-वफ़ा, दर्दे-तमन्ना क्या है - जाँ निसार अख़्तर

दर्दे-दिल, दर्दे-वफ़ा, दर्दे-तमन्ना क्या है आप क्या जानें मोहब्बत का तकाज़ा क्या है बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं आप माने या न माने...

Read more »

2
न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ - मुनव्वर राना
न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ - मुनव्वर राना

न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ ग़ज़ल मै आप बीती को मै जग बीती बनाता हूँ ग़ज़ल वो सिंफे-नाजुक है जिसे अपनी रफाक़त से वो महबूबा बना...

Read more »
 
 
Top