0
खुश्क मौसम रूत सुहानी ले गया - चाँद शेरी
खुश्क मौसम रूत सुहानी ले गया - चाँद शेरी

चाँद शेरी साहब के जन्मदिन के मौके पर उनकी यह गज़ल पेश है खुश्क मौसम रूत सुहानी ले गया चहचहाती जिंदगानी ले गया मंदिरों का, मस्जिदों का आ...

Read more »

0
मुझसे मत कर यार कुछ गुफ्तार, मै रोज़े से हूँ - ज़मीर जाफ़री
मुझसे मत कर यार कुछ गुफ्तार, मै रोज़े से हूँ - ज़मीर जाफ़री

रमज़ान का पाक़ महीना चल रहा है कुछ दिनों में ईद आ जायेगी इस रमज़ान के मौके पर आप सभी के लिए पकिस्...

Read more »

0
गुनाहगार हूँ उसका जिसपे हरकत उबाल रखा है - अज़हर साबरी
गुनाहगार हूँ उसका जिसपे हरकत उबाल रखा है - अज़हर साबरी

गुनाहगार हूँ उसका जिसपे हरकत उबाल रखा है उकुबत के बावजूद भी सबका ख्याल रखा है हर पहलु को नज़र-अ...

Read more »

0
ऊँचा है पर्वत - अशोक बाबू माहौर
ऊँचा है पर्वत - अशोक बाबू माहौर

  ऊँचा है पर्वत कद उसका ऊँचा न झुका न झुकेगा अटल हैं इरादे विश्वास के अम्बार खड़ा मूक अव...

Read more »

0
आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया - इमरान हुसैन आज़ाद
आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया - इमरान हुसैन आज़ाद

आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया ज़िन्दगी हमसे कोई ठौर बनाया न गया घर की वीरानियाँ रुसवा हुईं...

Read more »

0
 नाशाद हूँ पहले ही अब दिल न दुखाओ तुम - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश
नाशाद हूँ पहले ही अब दिल न दुखाओ तुम - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश

नाशाद हूँ पहले ही अब दिल न दुखाओ तुम इस रक्से-मुहब्बत से मत और रिझाओ तुम भूला न अभी तक हूँ अंजाम मुहब्बत का नग़मा-ए- वफ़ा गा कर फिर से ...

Read more »

0
बाबूजी - आलोक श्रीवास्तव
बाबूजी - आलोक श्रीवास्तव

बड़ी मशहूर ग़ज़ल है आलोक श्रीवास्तव जी की बाबूजी आप सबके लिए पेश है : घर की बुनियादें, दीवारें, बामो-दर थे बाबूजी सबको बांधे रखने वाला ख़ास...

Read more »

0
होंठ सींकर जख्म मेरे अधखुले से रह गये - कमलेश संजीदा
होंठ सींकर जख्म मेरे अधखुले से रह गये - कमलेश संजीदा

होंठ सींकर जख्म मेरे अधखुले से रह गये दिल की उस वेदना को भी बस सीने में दबाकर रह गये दूसरों के जख...

Read more »

0
हमारा देश - इब्ने इंशा
हमारा देश - इब्ने इंशा

आज इब्ने इंशा जी का जन्म दिवस आज याने १५ जून को है इस मौके पर उनकी यह रचना पेश है आशा है आपको यह पसंद आएगी " ईरान में कौन रहता है? &...

Read more »
 
 
Top