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सितम देखो कि जो खोटा नहीं है
चलन में बस वही सिक्का नहीं है

नमक ज़ख्मों पे अब मलता नहीं है
ये लगता है वो अब मेरा नहीं है

यहाँ पर सिलसिला है आंसुओं का
दिया घर में मिरे बुझता नहीं है

यही रिश्ता हमें जोड़े हुए है
कि दोनों का कोई अपना नहीं है

नये दिन में नये किरदार में हूँ
मिरा अपना कोई चेहरा नहीं है

मिरी क्या आरज़ू है क्या बताऊँ?
मिरा दिल मुझपे भी खुलता नहीं है

कभी हाथी, कभी घोड़ा बना मैं
खिलौने बिन मिरा बच्चा नहीं है

मिरे हाथोँ के ज़ख्मों की बदौलत
तिरी राहों में इक काँटा नहीं है

सफ़र में साथ हो.. गुज़रा ज़माना
थकन का फिर पता चलता नहीं है

मुझे शक है तिरी मौजूदगी पर
तू दिल में है मिरे अब या नहीं है

तिरी यादों को मैं इग्नोर कर दूँ
मगर ये दिल मिरी सुनता नहीं है

ग़ज़ल की फ़स्ल हो हर बार अच्छी
ये अब हर बार तो होना नहीं है

ज़रा सा वक़्त दो रिश्ते को ‘कान्हा’
ये धागा तो बहुत उलझा नहीं है -प्रखर मालवीय 'कान्हा'

Roman

sitam dekho ki jo khota sikka nahi hai
chalan me bas wahi sikka nahi

namak jakhmo pe ab malta nahi hai
ye lagta hai wo ab mera nahi hai

yaha par silsila hai aansuo ka
diya ghar me mire bujhta nahi hai

yahi rishta hame jode hue hai
ki dono ka koi apna nahi hai

naye din me naye kirdar me hi
mira apna koi chehra nahi hai

miri kya aarju hai kya batau?
mira dil mujhpe bhi khulta nahi hai

kabhi hathi, kabhi ghoda bana me
khilone bin mira bachcha nahi hai

mire hatho ke jakhmo ki badaulat
tiri raho me ik kata nahi hai

safar me sath ho... gujra jamana
thakan ka fir pata chalta nahi hai

mujhe shaq hai tiri moujudagi par
tu dil me hai mire ab ya nahi hai

tiri yado ko mai ignor kar du
magar ye dil miri sunta nahi hai

ghazal ki fasal ho har bar achchi
ye ab har baar to hona nahi hai

jara sa waqt do rishto ko 'Kanha'
ye dhaga to bahut uljha nahi hai - Prakhar Malviy 'Kanha'

परिचय -
आपका जन्म आज़मगढ़ ( उत्तर प्रदेश ) में हुआ | आपकी प्रारंभिक शिक्षा आजमगढ़ से हुई .. बरेली कॉलेज बरेली से B.COM और शिब्ली नेशनल कॉलेज आजमगढ़ से M.COM की डिग्री हासिल की ..वर्तमान में CA की ट्रेनिंग नॉएडा से कर रहे हैं

अमर उजाला, हिंदुस्तान , हिमतरू, गृहलक्ष्मी , कादम्बनी इत्यादि पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित .. 'दस्तक' और 'ग़ज़ल के फलक पर ' नाम से दो साझा ग़ज़ल संकलन भी प्रकाशित हो चुके हैं ..
आपके उस्ताद- स्वप्निल तिवारी 'आतिश' है |
#jakhira
सोचते हैं तो कर गुजरते हैं
हम तो मंझधार में उतरते हैं

मौत से खेलते हैं हम, लेकिन
ग़ैर की बंदगी से डरते हैं

जान अपनी तो है हमें भी अज़ीज़
फिर भी शोलों पे रक़्स करते हैं

दिल-फ़िगारों से पूछकर देखो
कितनी सदियों में घाव भरते हैं

जिनको है इंदिमाले-जख़्म अज़ीज़
आमदे-फ़स्ले-गुल से डरते हैं

छुपके रोते हैं सबकी नज़रों से
जो गिला है वो खुद से करते हैं- परवीन फ़ना सैयद

Roman

Sochte hai to kar gujrate hai
ham to majhdar me utrate hai

mout se khelte hai ham, lekin
gair ki bandgi se darte hai

jaan apni to hai hame bhi ajeez
fir bhi sholo pe raks karte hai

dil-figaro se puchkar dekho
kitni sadiyo me ghaav bharte hai

jinko hai indimale-zakhm azeez
aamde-fasle-gul se darte hai

chupke rote hai sabki nazro se
jo gila hai wo khud se karte hai - Parveen Fana Saiyyad
#jakhira
सख्त हालातों में हम इंसान हो गए
बुरा वक्त निकलते ही हम बेईमान हो गए

जिसको भी देखा तेरी उल्फत के दरवाजे पर
सभी के सभी अब भगवान हो गए

महकते फूलो में खुशबू अब किस काम की
गुलशन जब भंवरो से परेशान हो गए

मेरे जनाजे में वो बात कहा रही होगी
तेरे दर पर लाखो जिस्म जब कुर्बान हो गए

जब रुतबे की बात आयी तो हमने शहर छोड़ दिया
मुझसे काम रुतबे वालों के शहर में मकान हो गए

तड़प दिल की अब किसी को सुने नहीं जाती
मी हबीब ही मुझसे अब परेशान हो गए

उम्र बेत गयी इक महल बनाने में नीरज
आखिरी वक्त में दो पल के मेहमान हो गए - नीरज अहूजा

Roman

Sakht halaato me ham insaan ho gye...
Bura waqt nikalte hi ham baimaan ho gye,

jisko bhi dekha teri ulfat ke darwaje par...
Sabhi ke sabhi ab bhagwaan ho gye,

Mahakte phoolo me khushbu ab kis kaam ki...
Gulshan jab bhawro se pareshaan ho gye,

Mere janaaze me wo baat kaha rhi hogi...
Tere dar par lakho jism jab kurbaan ho gye,

Jab rutbe ke baat aayi to hamne shahar chhod diya...
Mujse kam rutbe walo ke shahar me makaan ho gye,

Tadap dil ki ab kisi ko sunaai nhi jati...
Mere habeeb hi mujse ab pareshaan ho gye,

Umar beet gyi ek mahal bnaane me Neeraj...
Akhiri waqt me do pal ke mehmaan ho gye - Neeraj Ahuja (Nirnkari)
#jakhira
वतन की आग बुझाओ .... वतन की आग बुझाओ
छोड़ के नफरत मिलजुल कर सब होली ईद मनाओ

अबुल कलाम आज़ाद की ये सौगात ना जलने देंगे
मुंबई हो के दिल्ली या गुजरात ना जलने देंगें

बात वतन की आ जाये तो भगत सिंह बन जाओ
वतन की आग बुझाओ .... वतन की आग बुझाओ

बिस्मिल जी के आंचता की आग दहकती होगी
सच है अशफाकुल्ला की रूह तड़पती होगी

अमर शहीदों के गुलशन पर गोले मत बरसाओ
वतन की आग बुझाओ .... वतन की आग बुझाओ

बारूदों के ढेर पे अपना देश अगर जलता है
जलने दो बस काम सियासत का अपना चलता है

ऐसे नेताओ को पहले सरहद पर पहुचाओ
वतन की आग बुझाओ .... वतन की आग बुझाओ - अल्लामा इकबाल

Roman

Watan ki aag bujhao....Watan ki aag bujhao
chhod ke nafrat miljul kar sab holi id manao

abul kalam azad ki ye sougat na jalne denge
Mumbai ho ke Dilli ya Gujrat na jalne denge

baat watan ki aa jaye to bhagat singh ban jao
Watan ki aag bujhao....Watan ki aag bujhao

bismil ji ke aanchta ki aag dahkati hogi
sach hai ashfaqulla ki ruh tadpati hogi

amar shahido ke gulshan par gole mat barsao
Watan ki aag bujhao....Watan ki aag bujhao

barudo ke dher pe apna desh agar jalta hai
jalne do bas kaa siyasat ka apna chalta hai

aise netao ko pahle sarhad par pahuchao
Watan ki aag bujhao....Watan ki aag bujhao - Allama Iqbal
#jakhira
अन्याय,शोषण, भेदभाव को सहना सीख लिया है
पत्थरों की तरह जीना लोगों ने सीख लिया हैं

अंधे,बहरे,गूंगे की तरह ज़ीना सीख लिया है
ज़मीर अपना गिरवी रखना लोगो ने सीख लिया है

रोशनी की एक किरण भी नही रही दिल में
इंसानियत को छोड़ना लोगों ने सीख लिया है

अन्याय,शोषण,भेदभाव की नाइंसाफी को सहते सहते
अपनी इंसानियत को बेचना लोगों ने सीख लिया है

इंसान ने अपने अपने अंदर की कमियों को छोड़कर
दूसरों की कमियो को गिनना लोगों ने सीख लिया है- मुनिकेश सोनी

Roman

anyay, shoshan, bhedbhav ko sahna sikh liya hai
pattharo ki tarah jeena logo ne sikh liya hai

andhe, bahre, gunge ki tarah jeena sikh liya hai
jameer apna girvi rakhana logo ne sikh liya hai

roshni ki ek kiran bhi nahi rahi dil me
insaniyat ko chhodna logo ne sikh liya hai

anyaay, shoshan, bhedbhav ki nainsafi ko sahte sahte
apni insaniyat ko bechna logo ne sikh liya hai

insaaan ne apne andar ki kamiyo ko chhodkar
dusro ki kamiyo ko ginna logo ne sikha liya hai - Munikesh Soni
#jakhira
अपने ख़्वाबों में तुझे जिसने भी देखा होगा
आँख खुलते ही तुझे ढूँढने निकला होगा

ज़िन्दगी सिर्फ़ तेरे नाम से मन्सूब रहे
जाने कितने ही दिमाग़ों ने ये सोचा होगा

दोस्त हम उसको ही पैग़ाम-ए-करम समझेंगे
तेरी फ़ुर्क़त का जो जलता हुआ लम्हा होगा

दामन-ए-ज़ीस्त में अब कुछ भी नहीं है बाक़ी
मौत आयी तो यक़ीनन उसे धोखा होगा

रौशनी जिससे उतर आई लहू में मेरे
ऐ मसीहा वो मेरा ज़ख़्म-ए-तमन्ना होगा-अब्बास अली दाना

Roman

apne khwabo me tujhe jisne bhi dekha hoga
aankh khulte hi tujhe dhundhne laga hoga

zindgi sirf tere naam se mandub rahe
jaane kitne hi dimago ne ye socha hoga

dost ham usko hi paigam-e-karam samjhege
teri furkat ka jo jalta hua lamha hoga

daman-e-jist me ab kuch bhi nahi hai baki
mout aayi to yakinan use dhokha hoga

roushni jisse utar aai lahu me mere
e masiha wo mera jakhm-e-tamnna hoga - Abbas Ali Dana
#jakhira